ऑनर किलिंग: 7 आरोपियों को उम्र कैद, शांतिनगर पुलिस थाना क्षेत्र की बहुचर्चित घटना

Nagpur District Court
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नागपुर. शांतिनगर पुलिस थाना अंतर्गत बहुचर्चित आनर किलिंग के मामले में 5 वर्ष बाद ही सही, अंतत: मंगलवार को सुनाए गए फैसले में जिला सत्र न्यायालय के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस.बी. गावंडे ने 7 आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई. हालांकि इसमें कुल 16 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिसमें से 4 आरोपी अभी तक फरार बताए जा रहे हैं. जबकि 5 अभियुक्तों को मामले से बरी कर दिया गया. आरोपियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अविनाश गुप्ता तथा सरकार की ओर से सरकारी वकील प्रशांत साखरे ने पैरवी की. अभियोजन पक्ष के अनुसार विक्की मेश्राम और आरोपियों के परिवार की युवती के बीच प्रेम संबंध थे. डेढ़ वर्ष से इन दोनों के बीच चल रहे प्रेम संबंधों के कारण विक्की के परिवार पर आरोपियों का रोष था. इसी मामले को लेकर 19 मई 2018 को विक्की के साथ मारपीट की गई.

समझौता करने से इनकार

विक्की के साथ हुई मारपीट के बाद पुलिस में मामला दर्ज किया गया. मामले में समझौता करने के लिए आरोपियों ने विक्सी और उसके भाई निखिल पर दबाव डाला. लेकिन दोनों ने समझौता करने से इनकार कर दिया. 20 मई 2018 की रात 9.30 बजे के करीब दोनों भाई कावरापेठ स्थित रामसुमेर बाबानगर के अपने आवास के सामने कुर्सी पर बैठे थे. इसी दौरान सभी आरोपी हथियार और मिर्ची पाउडर लेकर पहुंच गए. दोनों की आंखों में मिर्ची पाउडर झोंककर हमला कर दिया जिसमें दोनों गंभीर रूप से घायल हुए. दोनों को मेयो अस्पताल में भर्ती कराया गया. जिसके बाद डॉक्टर ने निखिल को मृत घोषित कर दिया. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी. अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपियों ने न केवल दोनों भाइयों पर हमला किया बल्कि बचाव में आए अन्य लोगों को भी लहूलुहान कर दिया जिसमें कुछ लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए थे.

4 महिलाएं फरार, अलग से दायर करें चार्जशीट

अभियोजन पक्ष के अनुसार मामले में 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 4 महिला आरोपी फरार हैं. लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने इन 4 महिलाओं को गिरफ्तार करने के बाद अलग से चार्जशीट दायर करने के आदेश भी दिए. सुनवाई के दौरान सरकारी वकील प्रशांत साखरे ने कहा कि आरोपी शंकर सोलंकी, देवा सोलंकी, सूरज राठौड़, रमेश सोलंकी, यश लखानी, मिख्खन सलाड, विजय चव्हाण ने घटना के समय जो कपड़े पहने थे, उन्हें जब्त कर रासायनिक परीक्षण के लिए भेजा गया था. अभियोजन पक्ष की दलील और ठोस सबूतों के बाद अदालत ने उक्त आदेश जारी किया. 

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