नागपुर: कोर्ट में बिल्डर का डबल गेम बेनकाब! हाई कोर्ट ने लगाई फटकार, पोहरा नदी STP परियोजना को मिली हरी झंडी

Ganesh Builders Plea Rejected MRTP Act: बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने गणेश बिल्डर की याचिका खारिज कर पोहरा नदी पर प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया है।
Pohra river STP Nagpur, Nagpur High Court
पोहरा नदी प्रदूषण नियंत्रण(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Sewage Treatment Plant Chikhli Land Reservation: पोहरा नदी प्रदूषण नियंत्रण योजना के तहत प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के निर्माण को लेकर बड़ी कानूनी बाधा दूर हो गई है। जमीन के आरक्षण को खत्म करने की मांग करने वाले गणेश बिल्डर की याचिका को बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने खारिज कर दिया। मामले की सुनवाई न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास की पीठ ने की।

अदालत ने अपने फैसले में बिल्डर के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उसके ‘दोहरे रवैये’ पर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि 2014 में खरीद नोटिस खारिज होने और जमीन के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज मांगे जाने के बाद भी बिल्डर ने करीब 10 वर्षों तक न तो कानूनी कदम उठाया और न ही बताई गई खामियों को दूर किया।

12 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर आरक्षण

शहर विकास योजना 21 सितंबर 2001 से लागू हुई थी। इसके तहत मौजा चिखली (खुर्द) के खसरा नंबर 38, 39/2 और 39/3 की कुल 12 हेक्टेयर से अधिक जमीन को ‘ड्रेनेज और सीवरेज डिस्पोजल स्कीम’ के लिए आरक्षित किया गया था। यह आरक्षण क्रमांक S-162 के तहत दर्ज था।

गणेश बिल्डर ने 20 जून 2014 को महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन (MRTP) अधिनियम की धारा 127 के तहत खरीद नोटिस जारी कर दावा किया कि अधिग्रहण की दिशा में समय पर कोई कदम नहीं उठाए जाने के कारण जमीन का आरक्षण समाप्त हो गया है। हालांकि, टाउन प्लानिंग अथॉरिटी ने 6 दिसंबर 2014 को यह नोटिस खारिज कर दिया।

नोटिस खारिज करने के पीछे एक अहम वजह यह भी थी कि बिल्डर द्वारा पेश किए गए तीन अलग-अलग 7/12 दस्तावेजों में जमीन के मालिक के रूप में तीन अलग-अलग संस्थाओं गणेश बिल्डर्स, गणेश बिल्डहोम इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और गणेश बिल्डर्स लिमिटेड के नाम दर्ज थे।

मुआवजा प्रक्रिया में भी लिया हिस्सा

हाई कोर्ट ने यह भी पाया कि बिल्डर एक ओर आरक्षण समाप्त होने का दावा कर रहा था, जबकि दूसरी ओर भूमि अधिग्रहण अधिकारी के समक्ष अधिग्रहण प्रक्रिया में हिस्सा ले रहा था। उसने मुआवजे के निर्धारण की प्रक्रिया में भाग लेने के साथ मुआवजा बढ़ाने के लिए 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 64 के तहत रेफरेंस भी दाखिल किया था।

अदालत ने बढ़ती आबादी के मद्देनजर प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट को ‘अत्यंत आवश्यक’ बताया। महाराष्ट्र सरकार द्वारा वित्तपोषित पोहरा नदी प्रदूषण नियंत्रण परियोजना का यह प्लांट शहर के मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का बोझ कम करने में अहम भूमिका निभाएगा। हाई कोर्ट के फैसले के बाद परियोजना के निर्माण का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है।

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