नागपुर में मानसून का अता-पता नहीं, पहले ही हटा दिए ग्रीन नेट! चौराहों पर धूप और उमस से उबल रहे वाहन चालक

Nagpur Green Net: नागपुर में मानसून आने से पहले ही प्रमुख चौराहों से ग्रीन नेट हटा दिए गए हैं, जिससे तेज धूप और उमस के बीच दोपहिया वाहन चालकों और राहगीरों की परेशानी बढ़ गई है।
No sign of the monsoon in Nagpur, yet green nets have already been removed! Motorists at intersections are sweltering in the heat and humidity
नागपुर, ग्रीन नेट, ट्रैफिक सिग्नल,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Traffic Signals: नागपुर सिटी में मानसून की प्रतीक्षा अभी जारी है लेकिन इससे पहले ही प्रमुख चौराहों पर लगाए गए ग्रीन नेट हटा दिए गए हैं। परिणामस्वरूप दोपहिया वाहन चालकों, ऑटो चालकों और ट्रैफिक सिग्नल पर रुकने वाले हजारों लोगों को तेज धूप और उमस का सामना करना पड़ रहा है। करीब 1 हफ्ता पहले ही ग्रीन नेट निकाल लिए गए थे। ऐसे में दोपहर के समय चौराहों पर कुछ मिनटों के लिए भी रुकना लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है।

शहर में हर वर्ष गर्मी के मौसम में नागपुर महानगरपालिका की ओर से प्रमुख ट्रैफिक सिग्नलों एवं व्यस्त चौराहों पर ग्रीन नेट लगाए जाते हैं। इनका उद्देश्य सिग्नल पर रुकने वाले वाहन चालकों को धूप से राहत देना होता है। इस वर्ष भी शहर के कई प्रमुख चौक-चौराहों पर यह व्यवस्था की गई थी। हालांकि मानसून के आगमन से पहले ही अधिकांश स्थानों से ग्रीन नेट हटा दिए गए हैं।

शहर में पिछले कुछ दिनों से बादलों की आवाजाही के बावजूद गर्मी और उमस बनी हुई है। दोपहर के समय तेज धूप और तापमान अधिक होने से लोगों को परेशानियां बढ़ गई हैं। ऐसे में चौराहों पर छांव की व्यवस्था समाप्त होने से वाहन चालकों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। विशेष रूप से दोपहिया वाहन सवार, बुजुर्ग और महिलाएं इस स्थिति से अधिक प्रभावित हो रहे हैं।

2 दिन की बारिश में व्यवस्था खत्म

नागरिकों का कहना है कि मौसम विभाग की ओर से मानसून के आगमन में अभी कुछ समय लगने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में ग्रीन नेट हटाने का निर्णय जल्दबाजी में लिया गया प्रतीत होता है। बीते दिनों इक्का-दुक्का दिन हुई बारिश के बाद ही इसे निकाल लिया गया। लोगों का मानना है कि नियमित वर्षा शुरू होने तक इन नेट्स को यथावत रखा जाना चाहिए था। इससे सड़क पर चलने वाले हजारों लोगों को राहत मिलती।

तापमान 41 के पार बरकरार

बता दें कि सिटी का अधिकतम तापमान 41 से 42 डिसे के बीच बना हुआ है। कई वाहन चालकों ने बताया कि ट्रैफिक सिग्नलों पर लाल बत्ती के दौरान 2 से 3 मिनट तक धूप में खड़ा रहना पड़ता है।

दोपहर के समय यह स्थिति और अधिक कष्टदायक हो जाती है। पहले ग्रीन नेट के कारण कुछ हद तक राहत मिल जाती थी लेकिन अब चौराहों पर सीधे धूप का सामना करना पड़ रहा है।

मनपा ने खर्च किए थे 65 लाख रुपये

चौक-चौराहों पर ग्रीन नेट लगाने के लिए 65 लाख रुपये का फंड मंजूर किया गया था। हालांकि काम देरी से शुरू होने के बाद कछुआ गति से किया गया। एक ओर जहां ग्रीन नेट लगाने में प्रशासन की सुस्ती दिखाई दी वहीं दूसरी ओर निकाले का काम फुर्ती से करते हुए 2 दिन में पूरा कर लिया गया। लोगों का कहना है कि 65 लाख खर्च करने के बावजूद ग्रीन नेट मानसून के पहले निकालना जनता के पैसों की बर्बादी है।

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