

Highlights
नागपुर जिले से बाहर चारे की बिक्री और परिवहन पर प्रतिबंध लगाया गया है।
जिलाधिकारी कुमार आशीर्वाद ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।
कम बारिश के कारण चारा उत्पादन घटने की आशंका जताई गई है।
हरे-सूखे चारे, कडबा, तनस, घास, कुट्टी, पुआल और टोटल मिक्स्ड राशन पर प्रतिबंध लागू है।
सरकारी योजनाओं और अधिकृत मंजूरी वाले परिवहन को छूट दी गई है।
आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Nagpur Drought Fodder Crisis: नागपुर जिले में संभावित चारा संकट को देखते हुए पशुधन के लिए चारे की उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से नागपुर जिले से बाहर चारे की बिक्री और परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस संबंध में जिलाधिकारी कुमार आशीर्वाद ने आदेश जारी किया है।
खरीफ सीजन में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होने के कारण राज्य सरकार ने सूखा घोषित कर विभिन्न उपायों और रियायतों को लागू किया है। औसत से कम बारिश होने के कारण जिले में चारे का उत्पादन अपेक्षा से कम रहने की आशंका है।
वहीं जिले में उत्पादित चारे को बड़े पैमाने पर बिक्री के लिए दूसरे जिलों और सीमावर्ती क्षेत्रों में भेजे जाने की संभावना है। इससे भविष्य में जिले में चारे की गंभीर किल्लत पैदा हो सकती है और पशुधन के पालन-पोषण की समस्या खड़ी हो सकती है।
नागपुर जिले में उपलब्ध हरे और सूखे चारे, कडबा, तनस, घास, कुट्टी, पुआल तथा टोटल मिक्स्ड राशन की बिक्री और परिवहन पर प्रतिबंध लागू किया गया है। सरकारी योजनाओं के तहत तथा पशु संवर्धन विभाग या जिला प्रशासन की ओर से अधिकृत मंजूरी प्राप्त चारे के परिवहन को इस आदेश से छूट दी गई है।
आदेश को लागू करने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों, उपविभागीय अधिकारियों, तहसीलदारों और पुलिस अधिकारियों को सौंपी गई है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नागपुर जिलाधिकारी कुमार आशीर्वाद ने यह भी सुनिश्चित किया है कि संकट की इस घड़ी में स्थानीय पंजीकृत गोशालाओं और जरूरतमंद पशुपालकों को रियायती दरों पर चारा उपलब्ध कराने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार किया जा रहा है।
इसके तहत जिले की सहकारी समितियों और पशु कल्याण संगठनों के साथ समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि दुधारू एवं अन्य महत्वपूर्ण पशुधन को भूखा न रहना पड़े और उनकी देखभाल सुचारू रूप से चलती रहे।
प्रशासन की ओर से सभी किसानों, व्यापारियों और ट्रांसपोर्टर्स से अपील की गई है कि वे इस आपदा की स्थिति में जिले के भीतर पशुधन बचाने के इस अभियान में सहयोग करें। कालाबाजारी या अवैध तरीके से चारे की ढुलाई करने वालों की सूचना तुरंत नजदीकी तहसील कार्यालय या पुलिस थाने को देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि समय रहते उचित कदम उठाए जा सकें।