मोवाड़ में किसानों की आर्थिक लूट, फर्जी डिमांड, रसीदें छापकर की धोखाधड़ी

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प्रतीकात्मक तस्वीर
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मोवाड़. काटोल महावितरण विभाग के नरखेड़ उपविभाग अंतर्गत मोवाड़ उपकेंद्र में कार्यरत एक कनिष्ठ अभियंता ने किसानों और बिजली उपभोक्ताओं के साथ बड़ी धोखाधड़ी की. उसने कृषि बिजली उपभोक्ताओं को फर्जी डिमांड नोट और फर्जी रसीदें दीं और कई किसानों और उपभोक्ताओं को आर्थिक तौर पर चपत लगाई. मामला उजागर होने के बाद महावितरण विभाग में खलबली मची हुई है. मामला जनवरी 2022 से मार्च 2023 के बीच का है. इस तरह का गिरोह काटोल महावितरण प्रभाग में सक्रिय है और पीड़ित किसानों को संदेह है कि यह गिरोह कार्यकारी अभियंता कार्यालय से उपकेंद्र तक सक्रिय है.

मोवाड़ महावितरण उपकेंद्र में कार्यरत कनिष्ठ अभियंता अनिकेत खोंड ने पिछले 2 वर्षों के दौरान क्षेत्र के जरूरतमंद किसानों को डिमांड नोटिस दिए. जल्द ही बिजली कनेक्शन मिलने की उम्मीद में किसानों ने खोंड पर विश्वास किया और मांग के अनुसार राशि जमा कर दी. उसने एकत्रित राशि की रसीद किसानों को दी. कुछ को बिजली का कनेक्शन भी मिल गया. 4 महीने पहले खोंड का प्रशासनिक तौर पर बारामती डिवीजन में तबादला किया गया लेकिन बिजली कनेक्शन मिलने के बावजूद बिजली बिल नहीं आने से कुछ किसानों ने महावितरण कार्यालय में पूछताछ की तो पता चला की डिमांड भरकर रसीद प्राप्त करने वाले ग्राहकों का कोई रिकॉर्ड महावितरण कार्यालय में नहीं है.

जांच-पड़ताल में किसानों के पास मौजूद डिमांड नोटिस और भुगतान रसीदें फर्जी पाई गईं. कुछ ग्राहकों को गलत बिल दिया गया और अधिक राशि की मांग की गई. राशि के अनुसार ग्राहक को महावितरण की रसीद दी गयी. किसान वासुदेव बले ने 16,185, अफसर खां पठान ने 16,295, रमेश वैद्य ने 16,295, नीलेश कड़ू ने 13,606 और वल्लभ पालीवाल ने 19,030 रुपए खोंड को दिए. इसके बदले में उन्हें दी गई रसीदें फर्जी निकलीं.

पीड़ित किसानों ने नरखेड़ थाने में इसकी शिकायत की है. पुलिस अधीक्षक नागपुर ग्रामीण को इसके बारे में सूचित कर आर्थिक अपराध शाखा इसकी जांच कर मामला दर्ज करेगी.

- कृष्णा तिवारी, थानेदार

आगे आएं किसान

शुरुआत में 8 से 9 किसानों की शिकायतें आयीं और इनकी संख्या बढ़ रही है. खोंड का तबादला होने से कार्रवाई में देरी हो रही है. कंपनी के नियम अनुसार कार्रवाई तो होगी. पीड़ित किसान आगे आकर शिकायत करें.

- दिलीप अघाव, कार्यकारी अभियंता, काटोल विभाग.

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