

Nagpur Hindi Minority Quota Admission: महाराष्ट्र प्रवेश नियामक प्राधिकरण (एआरए) ने नागपुर के 6 इंजीनियरिंग कॉलेजों में हिंदी भाषाई अल्पसंख्यक कोटा के तहत 320 छात्रों के प्रवेश को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है लेकिन अभी भी कॉलेज और उसके एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई होना बाकी है। तकीनीकी शिक्षा निदेशालय (डीटीए) और एआरए द्वारा शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के दस्तावेजों की जांच के दौरान दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर खामियां पाई गई थीं।
कई छात्रों के पास दो-दो ट्रांसफर, लिविंग सर्टिफिकेट मिले। एक में उनकी मूल मातृभाषा (मुख्य रूप से मराठी) दर्ज थी, जबकि दूसरे फर्जी सर्टिफिकेट में 'हिंदी' दर्शाकर अल्पसंख्यक कोटे का लाभ उठाने की कोशिश की गई थी।
इसके अतिरिक्त, एक ही प्राचार्य के अलग-अलग हस्ताक्षर वाले संदिग्ध दस्तावेज भी बरामद हुए। एनएसयूआई के पदाधिकारियों ने 9 जून और 16 जून को तकीनीकी शिक्षा निदेशालय के समक्ष यह मामला मजबूती से उठाया था और कॉलेज और उसके एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन किया गया था।
इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश एनएसयूआई के ठोस प्रयासों से संभव हुआ। पदाधिकारियों में अजीत सिंह, वैष्णवी भारद्वाज, आशीष मंडापे, प्रणय ठाकुर, विद्यासागर त्रिपाठी, दयाशंकर साहू और रॉयल गेडाम के नेतृत्व में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया था जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया।
एआरए द्वारा बुलाई गई विशेष सुनवाई में छात्र और अभिभावक उपस्थित हुए, जब उनसे वैध दस्तावेज मांगे गए, तो वे अपनी पात्रता साबित करने में असमर्थ रहे। नतीजतन एआरए ने सभी 320 अवैध प्रवेशों को खारिज कर दिया।