वैश्विक युद्ध की मार रसोई पर: संकट से बिगड़ा बजट, थोक तेल बाजार में 6 से 7 रुपये प्रति किलो तक का उछाल

Nagpur Edible Oil Prices: वैश्विक अनिश्चितता के बीच खाद्य तेलों के दाम बढ़ गए हैं। थोक बाजार में तेल 6-7 रुपये प्रति किलो और 15 किलो टिन 50-60 रुपये तक महंगा होने से घरेलू बजट पर असर पड़ा है।
Impact of global conflict on the kitchen: Crisis disrupts budgets; wholesale oil prices surge by ₹6–7 per kg.
खाद्य तेल महंगा, तेल के दाम, (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
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India Edible Oil Price Rise: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्ध और वैश्विक बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का असर अब भारतीय खाद्य तेल बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। पिछले कुछ दिनों में लगभग सभी प्रकार के खाद्य तेलों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।

थोक तेल बाजार में खाद्य तेल 6 से 7 रुपये प्रति किलो तक महंगे हो गए हैं, जबकि 15 किलो के एक टिन की कीमत में 50 से 60 रुपये तक का इजाफा हुआ है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी के घरेलू बजट पर पड़ रहा है।

व्यापारियों का कहना है कि युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। परिवहन और शिपिंग लागत में भी वृद्धि हुई है। इन परिस्थितियों के चलते आयातित खाद्य तेल महंगा हो गया है, जिसका असर घरेलू बाजार की कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है।

थोक का असर चिल्लर में

तेल व्यापारी अनिल अग्रवाल बताते हैं कि सोयाबीन तेल, राइस, फल्ली तेल, पाम ऑयल, सन फ्लावर तेल और अन्य खाद्य तेलों की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। थोक बाजार में बढ़े दामों का असर अब चिल्लर बाजार तक पहुंच गया है और ग्राहकों को पहले की तुलना में अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।

सोयाबीन तेल 50 से 60 रुपये बढ़कर 2550 से 2570 रुपये प्रति टिन व किलो में 6 से 7 रुपये प्रति किलो बढ़कर 168 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है। इसी तरह राइस तेल भी 2530 से 2550 रुपये प्रति टिन व किलो में 170 रुपये पर पहुंच गया है।

इसी तरह फल्ली व सनफ्लावर तेल 200 रुपये प्रति किलो के ऊपर चल रहे हैं। वहीं अचार का सीजन होने से सरसों तेल की डिमांड काफी अधिक बढ़ गई है, जिसके चलते सरसों तेल 2650 से 2700 रुपये टिन पर पहुंच गया है और किलो में यह भी 200 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है।

होटलों में पाम और कॉटन सीड्स तेल की डिमांड

वे बताते हैं कि होटलों में पामोलिन और कॉटन सीड्स की अधिक डिमांड होने के चलते इनके भाव भी काफी अधिक बढ़े हुए हैं। सोयाबीन तेल की तरह पामोलिन तेल भी 2550 से 2570 रुपये प्रति टिन और कॉटन सीड्स तेल 2600 से 2650 रुपये प्रति टिन पर जा पहुंचा है। इसके चलते होटलों में बनने वाले आइटम्स की कीमत भी तेजी से बढ़ती जा रही है। इन सबका झटका आम लोगों पर पड़ रहा है।

वहीं आगामी त्योहारों को देखते हुए यह बढ़ोतरी लोगों की चिंता और बढ़ा रही है। रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेश उत्सव, नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान घरों में मिठाइयां, नमकीन और अन्य व्यंजन बड़ी मात्रा में बनाए जाते हैं, जिनमें खाद्य तेल की खपत सामान्य दिनों की अपेक्षा अधिक होती है।

ऐसे समय में तेल की बढ़ी हुई कीमतें परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ डालेंगी। गृहिणियों और ग्राहकों का कहना है कि पहले से ही रसोई गैस, दाल, मसाले और अन्य खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से घरेलू खर्च बढ़ा हुआ है। अब खाद्य तेल के महंगे होने से रसोई का बजट और अधिक प्रभावित होगा। मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए यह महंगाई चिंता का विषय बन गई है।

कीमतों पर एक नजर

तेल पहले (₹/लीटर) अब (₹/लीटर) बढ़ोतरी
सोयाबीन 162 168 ₹6
राइस ब्रान 162 170 ₹8
मूंगफली (फल्ली) 194 200 ₹6
सनफ्लावर 194 200 ₹6
पामोलिन 163 170 ₹7
कॉटन सीड 175 180 ₹5
सरसों 192 200 ₹8
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