पूर्वी विदर्भ की बदलेगी तस्वीर: 6 जिलों में बनेगा ईस्टर्न विदर्भ इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, अधिक रोजगार का लक्ष्य!

Eastern Vidarbha Industrial: पूर्वी विदर्भ के 6 जिलों में औद्योगिक विकास को रफ्तार देने के लिए ईस्टर्न विदर्भ इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की योजना बनाई गई है। इससे 5 लाख से अधिक रोजगार की उम्मीद है।
The face of Eastern Vidarbha set to change: Eastern Vidarbha Industrial Corridor to be developed across 6 districts; goal is to boost employment!
ईस्टर्न विदर्भ इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, पूर्वी विदर्भ, प्रतीकात्मक तस्वीर(सोर्स: AI फोटो)
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Eastern Vidarbha Industrial Corridor: पूर्वी विदर्भ की खनिज संपदा, कृषि और वन संसाधनों का पूर्ण उपयोग कर इस क्षेत्र की तस्वीर बदलने के लिए राज्य सरकार ने 'ईस्टर्न विदर्भ इंडस्ट्रियल कॉरिडोर' की एक महत्वाकांक्षी विकास योजना तैयार की है।

नागपुर, वर्धा, गड़चिरोली, चंद्रपुर, भंडारा और गोंदिया-इन छह जिलों में फैला यह कॉरिडोर राज्य के औद्योगिक क्षेत्र में सबसे बड़े अवसर के रूप में उभर रहा है। वर्तमान में राज्य की कुल औद्योगिक अर्थव्यवस्था में इन छह जिलों का योगदान 5% से भी कम है। इस स्थिति को बदलने और 5 लाख से अधिक रोजगार के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से यह योजना बनाई गई है।

प्रशासनिक ढांचा

कॉरिडोर की निगरानी के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक 'स्टेट स्टीयरिंग कमेटी' और स्वतंत्र सीईओ वाला एक प्राधिकरण काम करेगा, इससे पूर्वी विदर्भ के आर्थिक विकास के साथ-साथ युवाओं के पलायन को रोकने में मदद मिलेगी। मिशन डायरेक्टर उद्योग विभाग के सचिव पी। अनबलगन और को-मिशन डायरेक्टर विभागीय आयुक्त विजयलक्ष्मी बिदरी को बनाया गया है।

कॉरिडोर की सफलता के 6 प्रमुख स्तंभ

  • बड़े उद्योगों का निवेश: जेएसडब्ल्यू और वारी (Waaree) जैसी प्रमुख कंपनियों द्वारा बुनियादी पूंजी का निवेश।
  • सप्लायर पार्क सहायक उद्योगों के लिए वेडर/सप्लायर पार्क का निर्माण।
  • बेहतर कनेक्टिविटी: रेलवे माल ढुलाई क्षमता और एक्सप्रेसवे के जरिए नागपुर से 90 मिनट की सीधी कनेक्टिविटी।
  • कौशल विकास: उद्योग-उन्मुख आईटीआई और पॉलिटेक्निक कॉलेजो की स्थापना।
  • आधुनिक टाउनशिप श्रमिकों के लिए अत्याधुनिक टाउनशिप, स्वास्थ्य और शैक्षणिक संस्थानों का निर्माण,
  • स्थानीय भागीदारी विकास कार्यों में स्थानीय समुदायों का जुड़ाव,

एकीकृत टाउनशिप का खाका (800 से 1200 एकड़ प्रति टाउनशिप)

श्रमिकों के रहने और काम करने के लिए एक एकीकृत इकोसिस्टम विकसित किया जाएगा, जिसका भूमि उपयोग इस प्रकार होगा। 55% केवल उद्योगों के लिए। 12% ग्रीन बेल्ट (हरित पट्टी), 12% - सड़कें और नागरिक सुविधाएं शेष क्षेत्र आवासीय और व्यावसायिक उपयोग के लिए रहेगा। अन्य प्रमुख सुविधाएंः 25,000 से 40,000 निवासियों के लिए आवास, 500 मेगावाट से अधिक का बेसलोड पावर ग्रिड और ई-रिक्शा ट्रैक।

72 महीने और 5 चरणों में क्रियान्वयन

इस परियोजना को 6 वर्ष (72 महीने) में 5 चरणों के तहत पूरा किया जाएगा 1 से 12 महीने में 6 नो का सर्वेक्षण और क्षेत्रीय योजना बनाई जाएगी। 13 से 24 महीने में कॉरिडोर अथॉरिटी की स्थापना और फंड को मंजूरी दी जाएगी।

25 से 36 महीने में अंतिम डीपीआर स्वीकृति और एमआईडीसी भूखंडों का आवंटन / सक्रियकरण किया जाएगा। 37 से 48 महीने में रेलवे और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी को पूरा किया जाएगा। 49 से 72 महीने में पहले स्टील का उत्पादन, एंकर कंपनियों का संचालन और मेगा फूड पार्क की शुरुआत की जाएगी।

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