कांग्रेस नगरसेवक पर गोलीबारी की केस सुलझी, 500 सीसीटीवी खंगालकर गुजरात और छत्तीसगढ़ से 7 आरोपी हिरासत में

Nagpur Corporator Firing Blind Case: नागपुर पुलिस ने नगरसेवक के घर हुई गोलीबारी की ब्लाइंड केस को सुलझाते हुए 500 सीसीटीवी फुटेज के जरिए 7 आरोपियों को दबोचा; मकोका के तहत कार्रवाई शुरू।
Vishwas Nangare Patil
विश्वास नांगरे पाटील(सोर्सः सोशल मीडिया)
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Drug Informer Attack Nagpur: नागपुर पुलिस ने वाठोड़ा ले-आउट स्थित श्रावण नगर में नगरसेवक के घर हुई सनसनीखेज गोलीबारी की गुत्थी को सुलझा लिया है। 26 अगस्त 2026 की आधी रात को मोपेड पर आए दो अज्ञात हमलावरों ने नगरसेवक के घर पर गोलियां चलाई थीं, जिससे गैलरी का कांच टूट गया था। शुरुआत में पूरी तरह से सुरागहीन ('ब्लाइंड केस') दिख रहे इस मामले को क्राइम ब्रांच, साइबर सेल और फॉरेंसिक टीम ने आधुनिक AI तकनीक, 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए महज कुछ ही दिनों में क्रैक कर दिया। पुलिस ने गुजरात और छत्तीसगढ़ में छापेमारी कर 7 संदिग्धों को हिरासत में लिया है।

अंकुश तुमसकर ने चलाई थी गोली, ऋषभ चला रहा था एक्टिवा

जांच के अनुसार, वारदात के वक्त मुख्य शूटर अंकुश तुमसकर मोपेड पर पीछे बैठकर गोलियां चला रहा था, जबकि ऋषभ नागदेवे एक्टिवा चला रहा था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक दोनों आदतन अपराधी हैं। अंकुश तुमसकर पर पहले से 46 आपराधिक मामले दर्ज हैं, वहीं ऋषभ नागदेवे पर 14 संगीन मुकदमे दर्ज हैं। दोनों के डिजिटल खातों और आपराधिक संपर्कों की गहन जांच जारी है।

50,000 रुपये का संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और ड्रग्स एंगल

मामले में आर्थिक लेनदेन का एक महत्वपूर्ण सिरा अमित ठाकरे नामक व्यक्ति के बैंक खाते से जुड़े 50,000 रुपये के ट्रांसफर से मिला है। सायबर टीम आरोपी के व्हाट्सएप चैट और डिजिटल बातचीत की जांच कर रही है। पुलिस की प्राथमिक जांच का मुख्य बिंदु यह है कि आरोपियों को शक था कि नगरसेवक क्षेत्र में चल रही नशीले पदार्थों (ड्रग्स) की तस्करी और खरीद-बिक्री की गुप्त जानकारी पुलिस को दे रहे थे। इसके अलावा घटना में एक संदिग्ध ट्रक और स्थानीय मददगारों की भूमिका की भी अलग से जांच की जा रही है।

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मास्टरमाइंड और महिला आरोपी फरार, मकोका लगाने की प्रक्रिया शुरू

इस पूरे मामले का मुख्य सूत्रधार (मास्टरमाइंड) और एक संदिग्ध महिला फिलहाल फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं। आरोपियों के संगठित आपराधिक इतिहास को देखते हुए नागपुर पुलिस ने उनके खिलाफ 'मकोका' (MCOCA - महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम) के तहत सख्त कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सुरागहीन मामले को इतने कम समय में सुलझाने पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने क्राइम ब्रांच की टीम को 25,000 रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।