

SIR Voter List Controversy: नागपुर जिले में एसआईआर के नाम पर पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का आरोप लगाते हुए शहर कांग्रेस ने अध्यक्ष प्रफुल गुडधे के नेतृत्व में संविधान चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक मोर्चा निकाला। '
चुनाव आयोग नहीं, भाजपा की शाखा, 2024 का चुनाव फर्जी था। और मोदी, शाह, ज्ञानेश कुमार जवाब दो। जैसे नारे लिखीं तख्तियां लेकर कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे मोर्चा जिलाधिकारी कार्यालय के लिए रवाना हुआ तो पुलिस ने यातायात पुलिस आयुक्त श्री. विश्वास नांगरे पाटील कार्यालय के पास बैरिकेड लगाकर रोक दिया।
इससे कार्यकर्ता भड़क उठे बैरिकेड पर चढ़कर जमकर नारेबाजी की गई। इतना ही नहीं, चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका गया। चुनाव आयोग व केन्द्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की भी मांग की गई।
इसी दौरान पुलिस ने आंदोलनकारियों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया जिससे कुछ समय के लिए हड़कंप मच गया। हालांकि बाद में गिरफ्तार पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को रिहा किया गया।
नागपुर जिले में आंदोलन के दौरान एक कार्यकर्ता ने चुनाव आयुक्त का मुखौटा पहना हुआ था जिसके हाथ में हथकड़ी लगी हुई थी। गुडधे उसे पकड़े हुए थे। 'वोट चोर गद्दी छोड़, नहीं चलेगी-नहीं चलेगी, तानाशाही नहीं चलेगी। जैसे नारे मोर्चा में लगाए गए।
इसके बाद जिलाधिकारी कार्यालय के सामने कुछ समय तक धरना दिया गया। गुडधे ने मांग की कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की जाए, चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखी जाए, पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बरकरार रखे जाएं तथा संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जाए, आंदोलन में विधायक संजय मेश्राम।
पूर्व विधायक अशोक धवड़, जिलाध्यक्ष अश्विन बैस, पूर्व जिप उपाध्यक्ष कुंदा राऊत, नंदा पराते, पुरुषोत्तम हजारे, सुभाष खोडे, वासुदेव ढोके, मोहम्मद कलाम, उषा खरबीकर, याज्ञवल्क्य जिचकार, दामोदर धर्माले, प्रशांत जग्यासी, अनिल मछले, प्रशांत ढाकणे, प्रसन्ना जिचकार, नाना झोडे सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए।
विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी भाजपा की देश में तानाशाही प्रवृत्ति और चुनाव आयोग के मनमाने कामकाज के खिलाफ पार्टी ने यह मोर्चा निकाला।
एसआईआर प्रक्रिया के नाम पर पात्र और अपने मताधिकार के हकदार मतदाताओं के नाम जानबूझकर मतदाता सूची से गायब किए गए हैं। यह महज तकनीकी गड़बड़ी नहीं बल्कि प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर विपक्ष का समर्थन करने वाली जनता को मतदान के अधिकार से वंचित करने का प्रयास है। यह सीधे तौर पर वोट चोरी और लोकतंत्र की खुली हत्या है।