पैसेंजर्स को प्रताड़ित कर रही आमला-नागपुर-आमला मेमू, हर दिन की देरी ने की हद पार

Amla-Nagpur-Amla MEMU: रेल प्रशासन की लापरवाही और तकनीकी अव्यवस्थाओं ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कोविड काल के बाद रेलवे ने लंबी दूरियों की पैसेंजर ट्रेनें बंद करके 200 KM के बीच मेमू थोंपी।
Amla-Nagpur-Amla MEMU: रेल प्रशासन की लापरवाही और तकनीकी अव्यवस्थाओं ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कोविड काल के बाद रेलवे ने लंबी दूरियों की पैसेंजर ट्रेनें बंद करके 200 KM के बीच मेमू थोंपी।
मेमू ट्रेन (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Nagpur Railways: यात्रियों को रेलवे से उम्मीद थी कि यह निर्णय उनके सफर को तेज और आसान बनाएगा। हालांकि हकीकत इससे कोसों दूर है। मध्य रेल नागपुर मंडल के तहत नागपुर और आमला के बीच चलाई जा रही मेमू ट्रेनें जैसे यात्रियों को सताने के लिए शुरू की गई हैं। उल्लेखनीय है कि आमला और नागपुर के बीच मेमू ट्रेन 61118 और 61120 परिचालित की जाती है। हालांकि साल के 365 दिनों में से 360 दिन ये मेमू देरी से ही नागपुर पहुंचती हैं और ट्रेन 61117 और 61119 बनकर देरी से रवाना हो रही हैं।

ऐसे में नागपुर से रवाना भी देरी से ही होती हैं। इतना ही नहीं, गोधनी स्टेशन से नागपुर स्टेशन तक केवल 7 किमी की दूरी के लिए 60 मिनट से 1.25 घंटे का समय लगता है। हर दिन हो रही लेटलतीफी के कारण दैनिक यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं रेलवे के इस अजीबोगरीब टाइमटेबल यात्रियों की प्रताड़ना से कम नहीं है।

लेटलतीफी की महारानी बनी मेमू

ट्रेन 61118 आमला-नागपुर मेमू का गोधनी स्टेशन पर निर्धारित समय शाम 4.50 बजे है। हालांकि यहां से रवाना होने का समय शाम 5.50 बजे तय किया गया है। इस प्रकार, ट्रेन 61120 आमला-नागपुर मेमू को सुबह 7.20 बजे पहुंचना चाहिए और सुबह 8.45 बजे रवाना होना चाहिए।

हैरानी की बात है कि केवल 7 किमी की दूर से एक लिए मेमू ट्रेनों को इतनी देर तक रोकना आम रेल यात्रियों की समझ से परे है। खैर, एक घंटे से अधिक रुकने के लिए समय पर गोधनी पहुंचे तो यात्री समाधान कर लें लेकिन रिकॉर्ड बताते हैं कि पूरे साल में ऐसा कभीकभार ही होता है।

शायद ही कोई दिन ऐसा हो जब इन मेमू ट्रेन ने देरी न दिखाई हो। ट्रेनों के स्टॉपेज में भारी कटौती के बाद लेटलतीफी की महारानी बन चुकी इन मेमू ट्रेनों में सफर करना यात्रियों की मजबूरी बन गई है। या ये कहें कि रेलवे ने यात्रियों को घुटने के बल मजबूर कर दिया है।

बात छोटी, असर बड़ा

रेलवे ने पैसेंजर ट्रेनें बंद कर यात्रियों के लिए मेमू ट्रेनें शुरू की लेकिन इसके परिचालन प्रबंधन में पूरी तरह से फेल साबित हो रही है। पूरे सालभर ही देरी से चलाया जाना, इस बात को साबित करता है कि रेलवे को मन मानकर आमला और नागपुर के बीच मेमू ट्रेन चला रही है। भले ही इस मेमू ट्रेन की घंटों की देरी रेलवे के लिए सामान्य हो लेकिन इस देरी से यात्रियों को गर्मी, भूख और प्यास से जूझना पड़ता है।

यात्रियों का कहना है कि रेल प्रशासन के पास इन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं है। नागपुर और इटारसी के बीच रेलवे ट्रैक 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के लिए अपग्रेड किया जा चुका है। भले ही तकनीकी रूप से मेमू ट्रेनों को इस रफ्तार से नहीं दौड़ाया जा सकता लेकिन इतने धीमे भी परिचालित नहीं किया जाना चाहिए कि इसमें सवार बच्चे, महिलायें, बुजुर्ग त्रस्त हो जायें।

प्लेटफॉर्म नहीं थे तो ये स्लॉट ही क्यों दिया

यात्रियों का कहना है कि गोधनी में ट्रेन को एक घंटा रोकने की वजह बताई जाती है कि इस समय नागपुर स्टेशन पर प्लेटफॉर्म खाली नहीं रहते। यदि रेलवे के पास उचित टाइम स्लॉट नहीं था तो फिर इन मेमू ट्रेनों को शुरू क्यों किया गया। यात्रियों ने बताया कि जब ट्रेन नागपुर से लेट होती हैं तो पूरे रूट पर इसका असर पड़ता है।

आमला से नागपुर या नागपुर से आमला पहुंचने में जहां ट्रेन को सामान्यतः 4 घंटे लगने चाहिए वहीं अब यह सफर 5 से 6 घंटे में पूरा हो रहा है। कुछ बार ट्रेन को बीच रास्ते में रोककर प्राथमिकता वाली एक्सप्रेस ट्रेनों को पास कराया जाता है जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इस समस्या पर रेल अधिकारियों ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

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