

Nagpur Humanity Social Support: नागपुर शहर के एक एंबुलेंस चालक की संवेदनशीलता ने साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है। चंद्रपुर जिले के बंगाली कैम्प निवासी 42 वर्षीय रमेन रमेश चक्रवर्ती की मिर्गी बीमारी के चलते मेडिकल हॉस्पिटल में उपचार के दौरान गुरुवार, 18 जून को मौत हो गई।
मिर्गी से पीड़ित रमेन अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला था। उसके परिवार में अपंग माता-पिता और 12 वर्षीय बेटा है। पत्नी पहले ही छोड़कर जा चुकी है। ऐसे में रमेन की आकस्मिक मृत्यु से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
पोस्टमार्टम रूम के पास एक पेड़ के नीचे रमेन के बुजुर्ग माता-पिता अपने 12 वर्षीय पोते के साथ बिलख रहे थे। आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि उनके पास चाय पीने तक के पैसे नहीं थे। बेटे के शव को गांव तक कैसे पहुंचाया जाए, यह चिंता उन्हें भीतर तक तोड़ रही थी। कुछ एंबुलेंस संचालकों ने शव ले जाने के लिए 7,000 रुपये का खर्च बताया, जिसे सुनकर पिता रमेश पूरी तरह निराश हो गए।
इसी दौरान एंबुलेंस (एमएच-46/बीजेड-4396) के चालक मालिक टिकू खड़से की नजर उस परेशान परिवार पर पड़ी। उन्होंने कारण पूछा तो अपंग व बुजुर्ग दंपति की मजबूरी जानकर उनका दिल पसीज गया। सबसे पहले टिंकू ने दोनों को चाय पिलाई और उनके नाती के लिए नाश्ते की व्यवस्था की। इसके बाद वह स्वयं उन्हें पुलिस चौकी ले गया और मृत्यु से जुड़ी सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करवाने में मदद की।
मानवता की मिसाल पेश करते हुए टिंकू ने रमेन के शव को निःशुल्क उनके गांव तक पहुंचाने का फैसला किया। दोपहर करीब 1 बजे वह मेडिकल से रवाना हुआ और लगभग 3 से 4 घंटे में रमेश के शव को उसके अपंग माता-पिता के साथ गांव पहुंचा दिया।
कुछ ही मिनटों में गांव वालों का भी जमावड़ा लग गया। जब ग्रामीणों को पता चला कि टिंकू ने इस सेवा के बदले एक रुपया भी नहीं लिया तो हर किसी की आंखें नम हो गईं। गांव वालों ने टिंकू को भोजन के लिए आमंत्रित किया और कहा कि पूरा गांव उन्हें हमेशा याद रखेगा।
हालांकि टिंकू ने विनम्रता के साथ उनका निमंत्रण ठुकरा दिया और वापस नागपुर जिले के लिए रवाना हो गया। टिंकू की इस दरियादिली ने साबित किया कि संवेदनाएं और इंसानियत आज भी समाज की सबसे बड़ी ताकत हैं।