नागपुर में गर्मी के बीच जलसंकट गहराया, 86 आरओ प्लांट बंद; शुद्ध पानी को तरसे ग्रामीण

Nagpur Rural Water Crisis: भीषण गर्मी के बीच जिले के ग्रामीण इलाकों में जलसंकट गहरा गया है। पिछले 5 वर्षों में 86 आरओ संयंत्र खराब होने से शुद्ध पेयजल की समस्या बढ़ी है।
Amidst the scorching heat in Nagpur, the water crisis deepens; 86 RO plants shut down as villagers yearn for clean water.
जलसंकट, आरओ संयंत्र,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur Clean Water Crisis: मई का महीना आधा गुजरने को है। भीषण गर्मी से लोगों का हाल बेहाल है और इसके साथ ही जिले के ग्रामीण भागों में जलसंकट भी लगातार गहराता जा रहा है। जिप प्रशासन द्वारा हालांकि जलापूर्ति के लिए युद्धस्तर पर उपाय किए जा रहे हैं, लेकिन पिछले 5 वर्षों में 86 गांवों के आरओ (जलशुद्धिकरण संयंत्र) खराब हो चुके हैं।

इससे शुद्ध पेयजल के लिए ग्रामीण तरस रहे हैं। ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए नए आरओ संयंत्रों के कार्य बड़े पैमाने पर शुरू किए गए हैं। 15वें वित्त आयोग, 9 पीएच रखरखाव एवं मरम्मत हेड तथा ओटीएसपी योजना के तहत ये काम चल रहे हैं लेकिन पहले लगाए गए आरओ खराब होने से संबंधित गांवों में नागरिक परेशान हो रहे हैं।

क्वालिटी से किया गया समझौता

जिप प्रशासन को शिकायतें मिली थीं कि लगभग 10 लाख रुपये मूल्य के आरओ संयंत्र बेहद कम लागत में ठेकेदारों द्वारा लगाए गए है जिसके चलते क्वालिटी से समझौता किया गया और वे खराब हो रहे हैं। इन शिकायतों के बाद जांच समिति गठित की गई थी। अब एक बार फिर बंद पड़े आरओ संयंत्रों का नया ऑडिट करने का निर्णय लिया गया है।

पहले चरण में 86 स्थानों पर आरओ बंद पाए गए है। प्रशासन का कहना है कि यह संख्या और बढ़ सकती है। कुछ स्थानों पर आरओ बहुत कम समय में ही खराब हो गए, जिसके कारण ग्रामीणों को शुद्ध पानी नहीं मिल पा रहा है। इन आरओ संयंत्रों की मरम्मत के लिए विशेष अभियान भी चलाया जाएगा, फिलहाल बंद पड़े आरओ संयंत्रों का आंकड़ा उपविभागीय स्तर से मंगवाया गया है।

आरओ संयत्र लगाने के बाद ठेकेदार को काम की राशि मिल जाती थी, रखरखाव और मरम्मत की कोई समय सीमा तय नहीं होने के कारण इस और ध्यान नहीं दिया जाता था लेकिन नई निविदा नीति में कम से कम 5 वर्ष तक रखरखाव और मरम्मत अनिवार्य कर दी गई है।

तब तक ठेकेदार की जमा राशि वापस नहीं की जाएगी, खराब पड़े आरओ संयंत्रों की मरम्मत का कार्य तत्काल शुरू किया जाएगा। अशोक धोंगे, कार्यकारी अभियंता, जिला परिषद ग्रामीण जलापूर्ति विभाग

14 गांवों में टैंकर से जलापूर्ति

गर्मी के मौसम को देखते हुए पानी की कमी से निपटने के लिए प्रशासन ने उपाययोजनाओं में तेजी लाई है। पानी के टैंकरों की फेरियां भी बढ़ा दी गई है। हिंगना और नागपुर ग्रामीण सहित 14 गांवों में 13 टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है।

वहीं कुओं के अधिग्रहण के जरिए 110 गांवों की प्यास बुझाने का प्रयास किया जा रहा है। हिंगना तहसील के नंदेस, पेंढरी, काजली, धानोली, कवडस, नवेगांव, कान्होली, आधारनगरी, इससनी, शिरुल और सावंगी आसोला गांवों में 8 टैंकरों की सहायता से पानी पहुंचाया जा रहा है।

वहीं नागपुर ग्रामीण तहसील के गोटाल पांजरी गांव में 4 टैंकर तथा रामटेक तहसील के वहांबा गांव में। टैंकर शुरू किया गया है। इन गांवों में निजी कुएं और बोरवेल पूरी तरह सूख चुके है। ग्रामीणों की इमों में पानी जमा कर टैंकरों का इंतजार करना पड़ रहा है, प्रशासन ने तत्काल राहत उपाय के तहत 110 गावों में 115 सार्वजनिक कुओं का अधिग्रहण किया है। नरखेड़ तहसील के 28, काटोल के 18, उमरेड के 20 तथा कुही तहसील के 12 गांवों में गंभीर जलसंकट की स्थिति बनी हुई है।

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