ताजुद्दीन बाबा का बंगाली कुर्ता आज भी सुरक्षित, जाधव परिवार ने संभाल रखी अमानत

Tajuddin Baba's Bengali Kurta: नागपुर में सुफीसंत हजरत बाबा मोहम्मद ताजुद्दीन का 103वां सालाना उर्स मनाया जा रहा है। इस बीच बाबा ताजुद्दीन का बंगाली कुर्ता आज भी सुरक्षित होने की खबर सामने आई है।
Tajuddin Baba's Bengali Kurta: नागपुर में सुफीसंत हजरत बाबा मोहम्मद ताजुद्दीन का 103वां सालाना उर्स मनाया जा रहा है। इस बीच बाबा ताजुद्दीन का बंगाली कुर्ता आज भी सुरक्षित होने की खबर सामने आई है।
जाधव परिवार के पूजाघर में रखा कुर्ता (सौजन्य-नवभारत)
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Tajuddin Baba's Bengali Kurta: सुफीसंत हजरत बाबा मोहम्मद ताजुद्दीन का 103वां सालाना उर्स नागपुर में मनाया जा रहा है। हजरत बाबा सैयद मोहम्मद ताजुद्दीन रहमतुल्लाह अलैह के 103 वे के सालाना उर्स के उपलक्ष्य में रोजाना शानदार कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे है। इसमें, सैकड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ शामिल हो रही है।

ताजुद्दीन बाबा ने कोंढाली यात्रा के दरम्यान लगभग 100 वर्ष पूर्व ही अपना बंगाली कुर्ता अपने भक्त तथा कोंढाली के जमींदार नानासाहव काटे को दिया था जो आज भी नानासाहब के नाती कोंढाली के जाधव परिवार के पूजाघर में सुरक्षित है। नागपुर-अमरावती महामार्ग पर कोंढाली तथा दुधाला क्षेत्र के नानासाहेब काटे प्रसिद्ध जमींदार थे। नागपुर के राजा भोसले के शासनकाल मे संपूर्ण कोंढाली क्षेत्र की जमींदारी नानासाहब के पास थी।

जाधव के पूजाघर में बाबा ताजुद्दीन का बंगाली कुर्ता

नागपुर के राजा प्रथम रघुजीराजे भोसले के में शासनकाल बारामती के समीप के काटेवाडी के बापूराव काटे तथा साधुराव काटे यह दोनों मराठा सरदार नागपुर आये थे। जिसमें बापूराव काटे के पुत्र नानासाहब थे। जिनकी मृत्यु कोंढाली में 1944 में हुई। कोंढाली तथा दुधाला गांव में काटे परिवार का लगभग 200 वर्ष पुराना भव्य बाड़ा है। जिसमें उनकी पुत्री इंदुबाई जाधव के पुत्र बालासाहब जाधव यह कोंढाली के बाड़े में तथा राजाबाल जाधव दुधाला में रहते है।

दुधाला के राजाबाल जाधव के पूजाघर में आज भी ताजुद्दीन बाबा का बंगाली कुर्ता है। राजाबाल जाधव से प्राप्त जानकारी अनुसार कोंढाली के जमींदार नानासाहब यह ताजुद्दीन बाबा के भक्त थे। उनके निमंत्रण पर ताजुद्दीन बाबा ने कोंढाली यात्रा की तथा कोंढाली से नागपुर वापस लौटते समय ताजुद्दीन बाबा ने नानासाहब को अपना एक बंगाली कुर्ता भेंट दिया था।

100 साल से भी पुराना कुर्ता

नानासाहब काटे को ताजुद्दीन बाबा ने यह बंगाली कुर्ता किस वर्ष दिया, इसकी जानकारी किसी को नहीं है। क्योंकि ताजुद्दीन बाबा ने 17 अगस्त 1925 को लगभग 65 वर्ष की उम्र में अपना शरीर त्यागा था। तो नानासाहब काटे का निधन 1944 में हुआ। इसलिए यह तो निश्चित है कि ताजुद्दीन बाबा की कोंढाली यात्रा 1925 के पहले हुई है। जिससे यह तो स्पष्ट है कि ताजुद्दीन बाबा की का यह बंगाली कुर्ता 100 वर्ष से ज्यादा पुराना है जो राजाबाल जाधव के दुधाला स्थित बाड़े के पूजाघर में आज भी सुरक्षित है। जिसकी नियमित पूजा जाधव परिवार आज भी भक्तिभाव से करता है।

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