'उड़ता महाराष्ट्र', नशे की चपेट में डूबा राज्य, बंद पड़ी फैक्ट्रियां बन रही ड्रग्स बनाने का अड्डा

Udta Maharashtra Illegal MIDC Drug Factories: महाराष्ट्र के विभिन्न इलाकों में बंद पड़ी फैक्ट्रियां बनीं ड्रग्स लैब। मुंबई पुलिस की साकीनाका रेड में 100 करोड़ की ड्रग्स जब्त, जांच जारी।
Maharashtra Illegal MIDC Drug Factories
सिंथेटिक ड्रग्स की गिरफ्त में महाराष्ट्र की युवा पीढ़ी, बंद फैक्ट्रियां बनी माफियाओं का अड्डा (प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स-AI)
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Udta Maharashtra Drug Menace: महाराष्ट्र के औद्योगिक हब कहे जाने वाले जिलों में बंद पड़े कारखाने अब राज्य के युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेलने का काम कर रहे हैं। सोलापुर के कुरकुंभ और नासिक जैसे विख्यात औद्योगिक क्षेत्रों में मौजूद बंद पड़ी रासायनिक (केमिकल) इकाइयों को तस्करों ने मेफेड्रोन (एमडी) जैसी घातक सिंथेटिक ड्रग्स बनाने की गुप्त प्रयोगशालाओं (लैब) में तब्दील कर दिया है। इन जगहों पर भारी मात्रा में ऐसे रसायनों का भंडारण किया जा रहा था, जिनकी मदद से बेहद कम समय में उच्च क्षमता वाली नशीली दवाएं तैयार की जा सकें। सुनसान और बंद होने के कारण इन फैक्ट्रियों की गतिविधियों पर आम लोगों या स्थानीय प्रशासन का ध्यान आसानी से नहीं जा पाता था।

इस अवैध नेटवर्क की जड़ें सिर्फ महाराष्ट्र तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका जाल अन्य राज्यों में भी बेहद गहराई से फैला हुआ है। महाराष्ट्र पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की संयुक्त तफ्तीश में यह सनसनीखेज सच सामने आया है कि मुख्य सरगनाओं ने कानून के शिकंजे से बचने के लिए तेलंगाना के संगारेड्डी और गुजरात के नांदोद जैसे दूरदराज के इलाकों और फार्महाउसों में अपनी अवैध फैक्ट्रियां स्थापित कर रखी थीं।

मुंबई और ठाणे बन रहे थे ड्रग्स की मुख्य सप्लाई चेन

जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि इन अंतर-राज्यीय और गुप्त ठिकानों पर तैयार की जाने वाली सिंथेटिक ड्रग्स की खेप को बेहद शातिराना तरीके से सड़क मार्ग के जरिए मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और उपनगरों के बाजारों में खपाया जा रहा था। कॉलेज के युवाओं और नाइट क्लबों को निशाना बनाने वाले इस अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल के खिलाफ हाल ही में मुंबई और मीरा-भायंदर पुलिस ने साकीनाका व अन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे मारे हैं। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने न केवल मुख्य कड़ियों को दबोचा है, बल्कि बाजार में जाने के लिए तैयार करीब 75 से 100 करोड़ रुपये की ड्रग्स भी बरामद की है।

Maharashtra Drugs Case

एमपीसीबी (MPCB) और जिला प्रशासन ने कसी कमर

औद्योगिक क्षेत्रों में केमिकल निर्माण की आड़ में चल रहे इस काले धंधे को पूरी तरह रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने अब कड़े कूटनीतिक और प्रशासनिक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। राज्य के सभी जिलाधिकारियों (कलेक्टर्स) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) को यह सख्त आदेश दिया गया है कि वे अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले एमआईडीसी (MIDC) परिसरों की सूची तैयार करें। इसके तहत सभी बंद पड़े रासायनिक संयंत्रों, गोदामों और संदिग्ध फैक्ट्रियों की औचक भौतिक जांच करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

पुलिस और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) का साझा महा-अभियान

राज्य को नशे के इस दुष्चक्र से बाहर निकालने के लिए महाराष्ट्र पुलिस और राज्य के अन्न व औषधि प्रशासन (FDA) की संयुक्त टीमों का गठन किया गया है। यह टीमें संदिग्ध दवा निर्माताओं, केमिकल सप्लायर्स और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के रिकॉर्ड खंगाल रही हैं ताकि नशीले पदार्थों को बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रिकर्सर केमिकल्स (Precursor Chemicals) की अवैध खरीद-बिक्री को पूरी तरह से रोका जा सके। राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले इस सिंडिकेट से जुड़े किसी भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा और यह धरपकड़ अभियान आगे भी पूरी कड़ाई से जारी रहेगा।

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