Mumbai: शिवतीर्थ पर फिर साथ दिखे ठाकरे भाई, क्या बन रहा है नया शिवसेना-मनसे गठबंधन?

Raj Thackarey And Uddhav Thackarey: उद्धव ठाकरे ने चौथी बार राज ठाकरे के घर ‘शिवतीर्थ’ पहुंचकर चाची को जन्मदिन की बधाई दी। लगातार बढ़ती मुलाकातों से शिवसेना-मनसे गठबंधन की अटकलें और तेज हो गई हैं।
Raj Thackarey And Uddhav Thackarey: उद्धव ठाकरे ने चौथी बार राज ठाकरे के घर ‘शिवतीर्थ’ पहुंचकर चाची को जन्मदिन की बधाई दी। लगातार बढ़ती मुलाकातों से शिवसेना-मनसे गठबंधन की अटकलें और तेज हो गई हैं।
राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे (सौ. सोशल मीडिया )
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Mumbai News In Hindi: संभावित गठबंधन की चर्चा के बीच बुधवार को शिवसेना (यूबीटी) के चीफ उद्धव ठाकरे अपने चचेरे भाई और एमएनएस चीफ राज ठाकरे के घर पहुंचे। इस महीने यह राज ठाकरे के घर 'शिवतीर्थ' में उद्धव ठाकरे का यह चौथा दौरा है।

उद्धव ठाकरे 'शिवतीर्थ' अपनी चाची और राज ठाकरे की माता मधुवंती को जन्मदिन की बधाई देने पहुंचे थे। मराठी त्योहार पाडवा भी था और मधुवंती का जन्मदिन भी। ऐसे में पत्नी के साथ उद्धव ठाकरे का 'शिवतीर्थ' पहुंचना और भी खास हो जाता है।

सूत्र कह रहे हैं कि 1 नवंबर को दोनों परिवार चुनाव आयोग के खिलाफ होने वाली रैली में एक साथ नजर आएंगे। राज और उद्धव का कहना है कि दोनों बीएमसी चुनाव को लेकर एक साथ आए हैं और संगठित रहना चाहते हैं। हालांकि अब तक दोनों ही पार्टियों ने किसी गठबंधन का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है।

इस मुलाकात के जरिए दोनों ही परिवारों के बीच नवंबर में होने वाली रैली को लेकर सियासी और सामाजिक समन्वय को और ताकतवर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन मुलाकातों के पीछे भाईचारा और एकजुट रहने का संदेश देने की कोशिश भी हो सकती है, ताकि बीएमसी चुनाव में माहौल उनके पक्ष में बन सके और दोनों ही दल मिलजुल कर काम करें।

कटुता को पीछे छोड़कर साझा रास्ता तलाशने का फैसला

अगर जून से देखें तो अबतक दोनों के बीच आठ मुलाकातें हो चुकी हैं। उस वक्त उन्होंने हिंदी थोपने के मुद्दे पर साथ में रैली की थी। दोनों चचेरे भाई-बहन और उनके परिवार पिछले सप्ताह शिवाजी पार्क में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना द्वारा आयोजित 'दीपोत्सव' कार्यक्रम के अवसर पर मिले थे।

राज ठाकरे ने 2005 में अविभाजित शिवसेना छोड़ दी थी और उद्धव ठाकरे को अपने इस्तीफे का जिम्मेदार ठहराया था। इसके बाद उन्होंने मनसे पार्टी बनाई थी। हालांकि, 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद, दोनों नेताओं ने कटुता को पीछे छोड़कर एकजुटता के लिए एक साझा रास्ता तलाशने का फैसला किया।

शिवसेना और मनसे नेताओं ने दावा किया है कि महाराष्ट्र में 31 जनवरी, 2026 से पहले होने वाले ग्रामीण और शहरी निकाय चुनावों से पहले दोनों दलों का एक साथ आना अब महज औपचारिकता मात्र है।

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