महाराष्ट्र में लागू हुआ धर्मांतरण विरोधी कानून, धोखाधड़ी या जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर 10 साल तक की जेल

Maharashtra Government: महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू हो गया है। जबरन या धोखाधड़ी से धर्मांतरण पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। परिवर्तन से 60 दिन पहले सूचना देना अनिवार्य होगा।
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सोर्स- सोशल मीडिया
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Maharashtra Anti Conversion Law Devendra Fadnavis: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026’ राज्य में आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब अवैध या जबरन धर्म परिवर्तन के मामलों में नए कानून के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह अधिनियम पहले बजट सत्र में महाराष्ट्र विधानमंडल से पारित हुआ था, जिसके बाद इसे राज्यपाल और फिर अंतिम स्वीकृति के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा गया था।

किन मामलों में होगी कार्रवाई

नए कानून के तहत किसी व्यक्ति का बलपूर्वक, धोखाधड़ी, लालच, झूठी जानकारी या केवल विवाह का प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराना दंडनीय अपराध माना गया है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना और अवैध धर्मांतरण की घटनाओं पर रोक लगाना है।

धर्म परिवर्तन से पहले देनी होगी सूचना

अधिनियम के अनुसार यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट को कम से कम 60 दिन पहले लिखित सूचना देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा धर्म परिवर्तन कराने वाले व्यक्ति या संस्था को भी तय नियमों का पालन करना होगा।

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शिकायत और सजा का प्रावधान

कानून में धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति के माता-पिता, भाई-बहन या अन्य निकट संबंधियों को शिकायत दर्ज कराने का अधिकार दिया गया है। अधिनियम का उल्लंघन करने वालों के लिए अधिकतम सात वर्ष तक की कैद का प्रावधान है, जबकि बार-बार अपराध करने वालों को 10 वर्ष तक की सजा हो सकती है।

महाराष्ट्र सरकार का मानना है कि इससे संगठित और अवैध धर्मांतरण के मामलों पर प्रभावी रोक लगेगी।

सरकार ने मंशा की स्पष्ट

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी भी व्यक्ति के स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन या अंतरधार्मिक विवाह में हस्तक्षेप करना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कानून केवल बल, धोखाधड़ी, प्रलोभन या गलत जानकारी के आधार पर होने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए बनाया गया है। महाराष्ट्र इस कानून को लागू करने वाला देश का नौवां राज्य बन गया है।

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