'फडणवीस और दाभोलकर की तुलना असंभव', सुप्रिया सुले के बयान पर भड़के हर्षवर्धन सपकाल, MVA में मचेगा घमासान

Harshwardhan Sapkal Statement: सुप्रिया सुले द्वारा देवेंद्र फडणवीस को डॉ. नरेंद्र दाभोलकर का वैचारिक उत्तराधिकारी बताने पर कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताया है। हर्षवर्धन सपकाल ने तीखा पलटवार किया है।
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सुप्रिया सुले व हर्षवर्धन सपकाल (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Harshwardhan Sapkal On Supriya Sule: महाराष्ट्र की राजनीति में 'महाविकास आघाड़ी' (MVA) के भीतर एक नया वैचारिक युद्ध छिड़ गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले के एक ताजा बयान ने सहयोगी दल कांग्रेस को असहज और नाराज कर दिया है। सुले ने अपने बयान में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की तुलना प्रसिद्ध तर्कवादी और अंधश्रद्धा उन्मूलन कार्यकर्ता डॉ. नरेंद्र दाभोलकर से करते हुए कहा कि फडणवीस उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

कांग्रेस का तीखा पलटवार

इस बयान को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भ्रामक बताया है। उन्होंने कहा कि डॉ. नरेंद्र दाभोलकर और देवेंद्र फडणवीस की तुलना हो ही नहीं सकती क्योंकि दोनों की विचारधारा और विरासत पूरी तरह अलग है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने दो टूक अंदाज में कहा कि सुप्रिया सुले को अपना बयान वापस लेना चाहिए। दाभोलकर ने अंधविश्वास के उन्मूलन और समाज को जागरूक बनाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया और इसी कार्य के दौरान वे शहीद हो गए।

दाभोलकर की विरासत वारकरी संप्रदाय को आगे बढ़ाने वाली

हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि डॉ. नरेंद्र दाभोलकर की विरासत शिव, शाहू, फुले, आंबेडकर के विचारों, अंधश्रद्धा उन्मूलन, सत्य और अहिंसा की है, जो वारकरी संप्रदाय को आगे बढ़ाने वाली है। उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है, जबकि फडणवीस का मार्ग अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाला, प्रगतिशील विचारों को पीछे धकेलकर प्रतिगामी विचारों को प्रोत्साहित करने वाला, समाज को अंधश्रद्धा की खाई में धकेलने वाला तथा भ्रष्टाचारियों का संरक्षण करने वाला है, इसलिए दोनों का मार्ग एक जैसा हो ही नहीं सकता है।

कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि जिन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत को नकारा, संत तुकाराम की गाथाओं को डुबोया, उनके वैचारिक वारिस फडणवीस है। क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले का विरोध करने वाली परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य भी फडणवीस कर रहे हैं। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को कालाराम मंदिर में प्रवेश न देने वाली मानसिकता का प्रतिनिधित्व भी वही करते हैं। संविधान को दरकिनार कर 'बंच ऑफ बॉट' जैसे संघ के विचारों को आगे बढ़ाने वाली सोच भी फडणवीस की है। सपकाल ने कहा कि डॉ. नरेंद्र दाभोलकर उनके लिए भाई समान थे।

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