

मुंबई: मुंबई 26/11 हमले का मास्टरमाइंड आरोपी तहव्वुर राणा को अमेरिका से प्रत्यर्पित करने के बाद NIA की खास सेल में रखा गया है। इस मामले की जांच की पूरी जिम्मेदारी महाराष्ट्र सरकार ने भी एनआईए को सौंप दी है। इस मामले में कोर्ट ने राणा को NIA की पूछताछ के लिए 18 दिन की रिमांड पर भेज दिया है। इस दौरान सेल के अंदर भी उसकी लगातार सीसीटीवी के जरिए और मैन्यूवली निगरानी की जा रही है।
एक ओर तहव्वुर राणा से पूछताछ की जा रही है तो वहीं उसे फांसी देने के लिए चर्चाएं भी तेज हो चुकी है। हालांकि इस मामले में कांग्रेस तहव्वुर राणा के साथ भी हमदर्द पेश होती नजर आ रही है। कांग्रेस ने हाल ही में कहा था कि तहव्वुर राणा पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए और जैसे कसाब को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था। ठीक वैसे ही राणा को भी मौका दिया जाए। इस बयान पर शाइना एनसी ने कांग्रेस को करारा जवाब दिया है।
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने 26/11 मुंबई हमलों के आरोपी तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण पर कहा, "इसकी शुरुआत कांग्रेस ने की थी। इसमें कोई श्रेय मोदी जी को नहीं जाता है।" उन्होंने आगे कहा, "तहव्वुर राणा 26/11 हमलों में शामिल था, और उसका प्रत्यर्पण केवल इसलिए संभव हो सका क्योंकि यूपीए सरकार ने सही समय पर उसका नाम जांच में डाला और उसे अमेरिका में गिरफ्तार कर लिया गया। 14 साल की सजा पूरी करने के बाद, उसे भारत प्रत्यर्पित किया गया।"
दिग्विजय सिंह की टिप्पणी पर शिवसेना नेता शाइना एनसी ने कहा, "यह पहली बार नहीं है जब दिग्विजय सिंह या कांग्रेस पार्टी ने विवादित बयान दिया हो। लेकिन कांग्रेस पार्टी का ट्रैक रिकॉर्ड देखिए। दिग्विजय सिंह ने इसे (26/11 आतंकी हमले) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जोड़ने की कोशिश की।"
शाइना एनसी ने आगे कहा, "यह भारत के लिए गर्व की बात है कि 2019 से प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका के साथ कूटनीतिक संबंध बनाए रखे हैं, हमने तहव्वुर राणा का प्रत्यर्पण किया है, जो 26/11 का मास्टरमाइंड है। उन सभी लोगों के लिए जिन्होंने अपनी जान गंवाई। वे शायद कांग्रेस पार्टी को देख रहे हैं और उसके वोट बैंक, तुष्टिकरण की राजनीति और उसकी विचारधारा के बारे में सोच रहे हैं। इसे फास्ट ट्रैक के जरिए मामले को चलाना चाहिए। आतंकवाद जहां लोगों अपनी जान गंवा चुके है वो राजनीति से मुद्दे से पूरी तरह अलग है।"
शिवसेना नेता शाइना एनसी ने कहा, "पृथ्वीराज चौहान को समझना चाहिए कि एक आतंकवादी एक आम अपराधी जैसा नहीं होता। एक आतंकवादी को बिना देरी किए तेजी से पकड़ा जाना चाहिए और उसे मौत की सजा दी जानी चाहिए। तहव्वुर राणा के मामले में, उसे फांसी की सजा दी गई थी। डेविड हेडली और आईएसआई के मेजर इकबाल के साथ मास्टरमाइंड को भी दोषी ठहराया गया है। इसलिए, मौत की सजा ही एकमात्र उचित कार्रवाई है, जो जनता की भावना के साथ मजबूती से जुड़ी हुई है।"