शिवसेना विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में तीखी बहस, CJI सूर्यकांत ने ठाकरे गुट को क्यों लगाई फटकार? जानें पूरा मामला

Supreme Court Hearing On Shiv Sena: सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना और चुनाव चिह्न विवाद पर सुनवाई हुई। इस दौरान CJI सूर्यकांत ने ठाकरे गुट के वकीलों को नेताओं के गैर-जिम्मेदाराना बयानों पर कड़ी फटकार लगाई।
CJI Suryakant Remarks In Shiv Sena Case
उद्धव ठाकरे व एकनाथ शिंदे (डिजाइन फोटाे)
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CJI Suryakant Remarks In Shiv Sena Case: शिवसेना पार्टी के नाम और उसके चुनाव चिह्न धनुष-बाण को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर गरमा गया है। आज सुप्रीम कोर्ट में इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई हुई। इस के दौरान भारी ड्रामा देखने को मिला। पिछले तीन-चार सालों से लंबित इस याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग कर रहे उद्धव ठाकरे गुट को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने ठाकरे गुट के वकीलों को उनके नेताओं के आचरण को लेकर कड़ी फटकार लगा दी। इस बीच, इस मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई को तय की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने आज कई लंबित मामलों की सुनवाई की। इनमें शिवसेना के चुनाव चिह्न और पार्टी की स्थिति से जुड़े मामले की सुनवाई भी शामिल थी। इस सुनवाई के दौरान उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के वकील एडवोकेट देवदत्त कामत ने अनुरोध किया कि इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द की जाए। ठाकरे गुट के इस अनुरोध के बाद, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एडवोकेट कामत को कड़ी फटकार लगाई।

CJI ने ठाकरे गुट के वकील का लगई फटकार

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सख्त लहजे में कहा कि इस मामले के संबंध में आपके नेता कोर्ट के बारे में तरह-तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं, उनके बयान अशोभनीय हैं। आपको अपने नेताओं पर लगाम लगानी चाहिए। ठाकरे गुट की ओर से दलीलें पेश करते हुए वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने कोर्ट से कहा कि इस मामले को आज केवल निर्देश लेने के उद्देश्य से सूचीबद्ध किया गया था। हमें उम्मीद है कि इस मामले की मुख्य सुनवाई जल्द से जल्द की जाएगी। उन्होंने एक तरह से गुहार लगाते हुए कहा कि हम पिछले तीन सालों से इस मामले में फैसले का इंतजार कर रहे हैं। हम बस यही चाहते हैं कि कोर्ट सुनवाई के लिए एक उचित समय निर्धारित करे।

CJI बोले- गैर-जिम्मेदाराना बयान बर्दाश्त नहीं

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने ठाकरे गुट का प्रतिनिधित्व कर रहे वकीलों द्वारा की गई टिप्पणियों पर बेहद सख्त शब्दों में कड़ी आपत्ति जताई। अपना रुख स्पष्ट करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम दोनों पक्षों से सहयोग की उम्मीद करते हैं। हम सुनवाई की तारीखें भी तय करेंगे। लेकिन, किसी भी स्तर पर देरी को लेकर कोर्ट के खिलाफ ऐसे गैर-जिम्मेदाराना बयान देना पूरी तरह से अनुचित है।

CJI सूर्यकांत ने आगे साफ शब्दों में चेतावनी दी कि हम हर दिन शाम 4 बजे तक कोर्ट में बैठकर काम करते हैं। अगर किसी को लगता है कि हम यहां खाली बैठे हैं, तो यह पूरी तरह से एक अलग बात है। लेकिन कोर्ट के कामकाज के बारे में इस तरह की टिप्पणियां किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। इसके बाद, चीफ जस्टिस ने घोषणा की कि इस मामले की सुनवाई 30 जुलाई को कोर्ट की छुट्टियों के बाद होगी।

इस बीच, शिवसेना के शिंदे गुट की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने ठाकरे गुट के बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई। रोहतगी ने कहा कि हमें कोर्ट पर काम के भारी बोझ और दबाव का पूरी तरह से अंदाजा है। हमारी तरफ से कोर्ट पर सवाल उठाने वाला कोई भी बयान नहीं दिया गया है, और न ही किसी भी पक्ष को ऐसा बयान देना चाहिए। कोर्ट ने अब तक इसमें शामिल सभी पक्षों के साथ बहुत सब्र से काम लिया है। इसलिए, किसी भी पक्ष को इस तरह से कोर्ट पर देरी करने का आरोप लगाने का कोई हक नहीं है।

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