

Sanjay Shirsat Reveals Operation Tiger: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है और ऑपरेशन टायगर शब्द इन दिनों हर राजनीतिक गलियारे में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। राजनीतिक हलकों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि उद्धव ठाकरे गुट के कई दिग्गज नेता, जिनमें सांसद और विधायक भी शामिल हैं, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सीधे संपर्क में हैं। इस सुगबुगाहट ने राज्य में एक और बड़े राजनीतिक उलटफेर की आशंका पैदा कर दी है। शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता संजय शिरसाट के हालिया बयानों ने इन अटकलों को और अधिक हवा दे दी है, जिससे ठाकरे खेमे में बेचैनी साफ देखी जा सकती है।
शिंदे गुट के कद्दावर नेता और राज्य के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने मीडिया से बातचीत के दौरान एक बड़ा खुलासा किया है, जिससे राज्य की सियासत गरमा गई है। शिरसाट ने पुष्टि की है कि ठाकरे गुट के कई सांसद और विधायक एकनाथ शिंदे के संपर्क में बने हुए हैं। जब उनसे ऑपरेशन टायगर के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही बेबाकी से जवाब दिया। शिरसाट ने कहा कि ऑपरेशन टायगर कब करना है, इसका सही समय खुद एकनाथ शिंदे तय करेंगे। शिरसाट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल उनकी मानसिकता किसी विशेष 'ऑपरेशन' को अंजाम देने की नहीं है, लेकिन उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि जो लोग स्वेच्छा से उनके साथ आना चाहते हैं, उनके लिए दरवाजे बंद नहीं हैं। उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले कुछ महीनों में ठाकरे गुट की एकता बनी रहना मुश्किल लग रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि पर्दे के पीछे कुछ बड़ी खिचड़ी पक रही है।
संजय शिरसाट के इस दावे ने राजनीतिक हलकों में सनसनी फैला दी है। उनके अनुसार, संपर्क में रहने वाले नेताओं की संख्या काफी है और एकनाथ शिंदे इस पूरी रणनीति के सूत्रधार हैं। शिरसाट का यह कहना कि कुछ महीनों में यह सब साथ रहेंगे ऐसा नहीं लगता, सीधे तौर पर ठाकरे गुट में होने वाली संभावित टूट की ओर इशारा करता है। यदि शिरसाट के दावे सच साबित होते हैं, तो महाराष्ट्र की राजनीति में यह एक और ऐतिहासिक 'भूकंप' की तरह होगा।
राजनीतिक दांव-पेच के अलावा, संजय शिरसाट ने अन्य ज्वलंत मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने मुंबई में रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जब अन्य राज्यों में वहां की स्थानीय भाषा बोली जाती है, तो मुंबई में मराठी क्यों नहीं? उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नियमों का पालन नहीं किया गया, तो इसे हठधर्मिता माना जाएगा और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, उन्होंने रोहित पवार के आंदोलन को 'राजनीतिक रोटियां सेंकने' का जरिया बताया। कुल मिलाकर, 'ऑपरेशन टायगर' की चर्चाओं ने महाराष्ट्र के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है और सभी की नजरें अब एकनाथ शिंदे के अगले कदम पर टिकी हैं।