

Sanjay Raut Against Election Commission: मनसे प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक संयुक्त विरोध मार्च का नेतृत्व कर रहे हैं। इस विरोध मार्च को लेकर शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने तीखा हमला बोला है।
राउत ने कहा, यह विरोध देश में चल रही तानाशाही, चुनावों को हाईजैक करने, चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट को अपनी जेब में रखने, वोट और चुनाव चुराने, और सांसदों व विधायकों को तोड़ने के खिलाफ है। यह उन सभी चीजों के खिलाफ एक विद्रोह है, ठीक वैसा ही जैसा 1857 में हुआ था। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने इस विरोध मार्च की घोषणा की है, जिसे पूरे महाविकास अघाड़ी का समर्थन प्राप्त है।
संजय राउत ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा सभी चुनावों को 'गैर-कानूनी' बताए जाने के बाद राउत ने और आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने कहा, चुनावों में धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और हेरफेर हुई है। पूर्व सीईसी राजीव कुमार और मौजूदा सीईसी ज्ञानेश कुमार की भूमिका संदिग्ध है। सभी चुनाव रद्द किए जाने चाहिए और विधानसभा व लोकसभा चुनाव फिर से कराए जाने चाहिए।
एक अन्य बयान में राउत ने कहा, यह देश भर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक बड़ा आंदोलन है और इसकी गूंज मुंबई में साफ तौर पर दिखाई दे रही है। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में यह मार्च हो रहा है।
उन्होंने चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा, जिस तरह से चुनाव कराए गए हैं, जिसमें गड़बड़ी, भ्रष्टाचार और धांधली के आरोप लगे हैं, उसे देखते हुए ज्ञानेश कुमार और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार, दोनों ही देश के दुश्मन हैं।
इधर, इस सियासी हलचल के बीच एमपीएससी के छात्रों का मुद्दा भी गरमाया हुआ है। पुणे में एमपीएससी की तैयारी कर रहे छात्र पिछले तीन-चार दिनों से दिन-रात धरने पर बैठे हैं। इस मुद्दे पर राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, रोहित पवार ने इस मुद्दे को उठाया है, उनका गुस्सा पेपर लीक, प्रक्रिया में गड़बड़ी और अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता की वजह से है।
एमपीएससी में हुए घोटालों की निष्पक्ष जांच और हजारों खाली पदों पर तुरंत भर्ती, सरकार ने इन मांगों को लेकर कई आश्वासन दिए हैं। फिर भी विरोध-प्रदर्शन रुका नहीं है। इसके उलट, छात्रों को बांटने की कोशिश की गई हैं और उन्हें नोटिस भेजे गए हैं। मैं आज शाम 6:30 बजे इस विरोध-प्रदर्शन स्थल पर जा रहा हूं। यह महाराष्ट्र के भविष्य का सवाल है!