संजय राउत ने पकड़ी विपक्ष से अलग राह! चुनाव आयोग के समर्थन में कही ऐसी बात कि मच गया घमासान

Election Commission: संजय राउत ने चुनाव आयोग का बचाव करते हुए कहा कि हर बार उसकी आलोचना करना सही नहीं। सुप्रीम कोर्ट में भी आयोग ने राजनीतिक दलों पर नैरेटिव सेट करने का आरोप लगाया।
जान से मारने की धमकियों पर संजय राउत का करारा जवाब
संजय राउत (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Maharashtra News: चुनाव आयोग को लेकर अक्सर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चलता रहता है, लेकिन इस बार शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत के ताजा बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। राउत ने आयोग के पक्ष में बयान देते हुए कहा है कि यदि चुनाव आयोग लोकतंत्र की रक्षा के लिए कुछ नियम बनाता है, तो उसे सुना भी जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हर बार आयोग की आलोचना करना सही नहीं है, क्योंकि यह संस्था लोकतांत्रिक प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है।

सुप्रीम कोर्ट में आयोग का जवाब

सुप्रीम कोर्ट में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने गंभीर चिंता जताई। आयोग ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल और एजेंसियां चुनाव प्रक्रिया में सहयोग करने के बजाय जनता की सोच को प्रभावित करने का प्रयास कर रही हैं। आयोग के अनुसार, कुछ राजनीतिक ताकतें “नैरेटिव सेट” कर निष्पक्ष चुनावों के माहौल को प्रभावित करना चाहती हैं।

राउत का संतुलित रुख

संजय राउत ने कहा, “अगर चुनाव आयोग कोई नियम बनाता है, जिससे लोकतंत्र मजबूत होता है, तो उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। हर बार चुनाव आयोग पर सवाल उठाना सही नहीं है।” उनके इस बयान को आयोग के समर्थन में देखा जा रहा है, जो विपक्ष के कुछ अन्य नेताओं की राय से अलग है, जिन्होंने हाल ही में आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्न उठाए थे।

पुराने बयान से दिखा विरोधाभास

हालांकि, यह वही संजय राउत हैं, जिन्होंने पहले चुनाव आयोग पर सख्त टिप्पणी की थी। बिहार चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने "मतदाता अधिकार यात्रा" के माध्यम से चुनाव आयोग और भाजपा की सच्चाई उजागर कर दी है। ऐसे में राउत के पुराने और नए बयानों के बीच विरोधाभास साफ नजर आता है।

क्या है बदले रुख के पीछे कारण?

संजय राउत के इस बदले रुख को लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। कई विश्लेषक मानते हैं कि यह बदलाव आगामी चुनावों और बदलते राजनीतिक समीकरणों से जुड़ा हो सकता है। कुछ का मानना है कि यह एक रणनीतिक बयान है, जिससे शिवसेना (यूबीटी) एक संतुलित राजनीतिक छवि पेश करना चाहती है।

राउत का यह बयान उस वक्त आया है जब चुनाव आयोग पर विपक्ष की तीखी नजर बनी हुई है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में उनके रुख में और कोई बदलाव देखने को मिलता है या नहीं।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com