

Sanjay Raut Attacks Modi Government: शिवसेना (यूबीटी) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार के खिलाफ एक बार फिर तीखा मोर्चा खोला है। किसानों के दिल्ली मार्च, NEET पेपर लीक मामले और पार्टी के 6 सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट वाली शिवसेना में आधिकारिक विलय जैसे देश के प्रमुख ज्वलंत मुद्दों को लेकर राउत ने केंद्र सरकार की नीतियां और मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार पूरी तरह से किसान, युवा और देश की शिक्षा व्यवस्था की अनदेखी करने में जुटी है।
किसानों के दिल्ली मार्च पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने कहा कि यह सरकार किसान विरोधी और मजदूर विरोधी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए काम कर रही है और उसे न किसानों की चिंता है और न ही युवाओं की। जब खासकर पंजाब के किसान दिल्ली पहुंचेंगे, तब यह सरकार संसद से भागने पर मजबूर हो जाएगी।
उद्धव ठाकरे गुट के 6 बागी सांसदों के आधिकारिक तौर पर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय को मंजूरी मिलने पर भी संजय राउत ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि ये सांसद बागी नहीं बल्कि गद्दार हैं। उन्होंने कहा कि भगत सिंह और सुखदेव जैसे क्रांतिकारी बागी थे।
सोमवार को सड़कों पर उतरे छात्र भी बागी थे लेकिन जो पैसे लेकर बिक गए, वे गद्दार हैं पर बागी नहीं। अगर हमारे 6 सांसद उनके साथ चले गए हैं, तो वे गद्दार हैं। वे मंगल मिलन में शामिल हो रहे हैं। अगर वे किसी असली संघर्ष में शामिल होते, तो मैं उन्हें स्वीकार करता।
संजय राउत ने नीट पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर भी मोदी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में सोमवार को इस मुद्दे पर बड़ा प्रदर्शन हुआ था। उन्होंने बताया कि सोनम वांगचुक ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू की।
संजय राउत ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और उन्हें प्रताड़ित किया गया। उन्होंने कहा कि असल सवाल यह है कि आप धर्मेंद्र प्रधान को बचाना चाहते हैं या देश की शिक्षा व्यवस्था और युवाओं का भविष्य। यही सबसे बड़ा अंतर है।