'मुख्यधारा से जुड़ने के लिए कम हो मदरसों की संख्या'; संजय निरुपम का बड़ा बयान, राहुल गांधी पर भी साधा निशाना

Mumbai News: शिवसेना नेता संजय निरुपम ने मदरसों को मुख्यधारा की शिक्षा में बाधक बताते हुए उनकी संख्या कम करने की मांग की है। उन्होंने राहुल गांधी और उमर खालिद की विचारधारा पर भी तीखे सवाल उठाए हैं।
Shiv Sena leader Sanjay Nirupam called for reducing the number of Madrasas to integrate students into the mainstream. He also criticized Rahul Gandhi and Umar Khalid over national interest issues.
संजय निरुपम का बड़ा बयान, राहुल गांधी पर भी साधा निशाना (फोटो-सोशल मीडिया)
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Uniform Education System: शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता संजय निरुपम ने गुरुवार को मदरसा शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाया है। उन्होंने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "भारत में एक कानून, एक संविधान और एक गवर्नेंस सिस्टम है, और शिक्षा प्रणाली भी एक समान होनी चाहिए।

संजय निरुपम ने कहा, "स्कूल और कॉलेज, खासकर प्राइमरी और सेकेंडरी स्तर पर, ऐसे बनाए गए हैं कि सभी छात्र देश की मुख्यधारा में शामिल हो सकें, लेकिन मदरसों में दी जाने वाली शिक्षा धार्मिक शिक्षाओं पर अधिक केंद्रित होती है, जिससे छात्र भारत से दूर हो जाते हैं।"

निरुपम ने तर्क दिया कि बच्चों को देश की मुख्यधारा का हिस्सा बनाए रखने, देश से प्यार करने और गवर्नेंस सिस्टम में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मदरसों की संख्या धीरे-धीरे कम करनी चाहिए। उनका कहना है कि यह कदम छात्रों के भविष्य और राष्ट्रीय एकता के लिए आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि आधुनिक शिक्षा से वंचित रहने वाले बच्चे समाज में अलग-थलग पड़ सकते हैं और राष्ट्रीय विकास में योगदान नहीं दे पाते।

इसके अलावा, संजय निरुपम ने छात्र नेता उमर खालिद का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे युवा अक्सर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कुछ खास विचारधारा को बढ़ावा देने के नाम पर ऐसी गतिविधियों में शामिल होते हैं जिनसे देशविरोधी भावनाएं पैदा होती हैं।

संजय निरुपम ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। निरुपम का आरोप है कि राहुल गांधी अपनी बातों पर जोर देते हुए अक्सर देश के हित से समझौता करते दिखते हैं। जब कोई नेता देश के हित से समझौता करता है या ऐसा प्रतीत होता है, तो वह धीरे-धीरे देश विरोधी गतिविधियों से जुड़ सकता है, जैसा कि उमर खालिद के मामलों में देखा गया है।

उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले मालेगांव महापालिका ऑफिस में लोग नमाज पढ़ते पाए गए, लेकिन सरकारी दफ्तरों में नमाज नहीं पढ़नी चाहिए। अगर ऐसा करना भी है तो उसके लिए एक विशेष परमिशन की व्यवस्था है। उन लोगों को अगर ऐसा लगता है कि वहां पर देश का कानून नहीं चलता, तो यह पूरी तरह से गलत है।

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