

Sachin Ahir Message to Uddhav Thackeray: महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर' और शिवसेना (यूबीटी) में मचे घमासान के बीच एक बेहद चौंकाने वाली इनसाइड स्टोरी सामने आई है। आदित्य ठाकरे के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार और विधान परिषद सदस्य सचिन अहीर ने एकनाथ शिंदे के खेमे में आधिकारिक रूप से शामिल होने और विधान परिषद के उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन भरने से ठीक पहले उद्धव ठाकरे को एक सीक्रेट विदाई संदेश भेजा था।
6 सांसदों की बगावत के बाद लगे इस दूसरे सबसे बड़े झटके से जहां पूरी पार्टी स्तब्ध है, वहीं राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि सचिन अहीर ने बेहद सधे हुए और भावुक शब्दों के जरिए 'मातोश्री' से अपनी विदाई ली है।
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, सचिन अहीर ने पाला बदलने की आधिकारिक घोषणा करने से कुछ मिनट पहले ही उद्धव ठाकरे के व्यक्तिगत नंबर पर एक व्हाट्सएप संदेश भेजा था। इस संदेश में अहीर ने लिखा, "मैं कुछ ऐसे अपरिहार्य और विशेष कारणों से यह कदम उठा रहा हूं, जिन्हें टाला नहीं जा सकता था। मैं आज जो कुछ भी हूं, उसमें आपके द्वारा दिए गए अवसरों और स्नेह का बड़ा योगदान है। आपने मुझ पर जो विश्वास और प्रेम दिखाया, उसके लिए मैं सदैव आपका आभारी रहूंगा। मुझे पूरी आशा है कि हमारा यह व्यक्तिगत स्नेह और प्रेम भविष्य में भी इसी तरह बना रहेगा।"
सचिन अहीर ने अपने इस विदाई संदेश के अंत में उद्धव ठाकरे की पार्टी के लिए एक ऐसी लाइन लिखी जिसने राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। अहीर ने लिखा, "भले ही आज हमारे राजनीतिक रास्ते अलग हो रहे हैं, लेकिन आपकी पार्टी के उज्ज्वल भविष्य के लिए मेरी शुभकामनाएं हमेशा बनी रहेंगी।"
आपको बता दें कि विधान परिषद में सचिन अहीर का कार्यकाल साल 2028 तक सुरक्षित है। लेकिन अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि इस दलबदल के पीछे की असली स्क्रिप्ट साल 2029 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर लिखी गई है, जहां शिंदे गुट सचिन अहीर को वर्ली विधानसभा सीट से सीधे आदित्य ठाकरे के खिलाफ मैदान में उतारने की तैयारी कर रहा है। यही वजह है कि इसे ठाकरे परिवार के लिए एक 'दोहरा झटका' माना जा रहा है।
शिंदे गुट की ओर से विधान परिषद के उपाध्यक्ष पद का पर्चा दाखिल करने के बाद सचिन अहीर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और ठाकरे गुट के शीर्ष नेतृत्व पर इशारों-इशारों में तीखा हमला बोला। अहीर ने कहा, "मैंने पार्टी में रहते हुए उद्धव जी और आदित्य ठाकरे द्वारा सौंपी गई हर छोटी-बड़ी जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाया है और खुद एकनाथ शिंदे इसके गवाह रहे हैं।
एक राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में हमें वहां काम करना होता है जहां हमारी संगठनात्मक क्षमता का सही सम्मान हो। मुंबई महानगरपालिका, विधानसभा और पुणे के 21 डिवीजनों में मेरा क्या योगदान रहा है, यह वहां की जनता भलीभांति जानती है। दुर्भाग्य से, आज कुछ लोगों को यह गलतफहमी हो गई है कि पार्टी में सिर्फ वे अकेले ही सब कुछ हैं और जमीन पर काम करने वाले दूसरों का कोई अस्तित्व नहीं है।"