

Priyanka Chaturvedi Slams RSS: अयोध्या में भव्य राम मंदिर के दान पात्रों से चंदा चोरी होने के मामले ने अब एक बड़ा राजनीतिक और आध्यात्मिक मोड़ ले लिया है। महीनों की चुप्पी के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिस पर ठाकरे गुट की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने जबरदस्त पलटवार किया है। उन्होंने आरएसएस के रियलाइजेशन पर सवाल उठाते हुए इसे सत्ताधारियों के पाखंड से जोड़ दिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने एक बयान जारी कर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि करोड़ों रामभक्तों के समर्पण से बने इस मंदिर में चोरी की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है और इसने समूचे हिंदू समाज की आस्था को गहरा आघात पहुंचाया है। होसबले ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी की सराहना करते हुए मांग की कि दोषियों को कठोर दंड मिलना चाहिए और मंदिर प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने हिंदू समाज से धैर्य रखने की अपील की ताकि हिंदू विरोधी और राष्ट्र विरोधी शक्तियां इस घटना का लाभ न उठा सकें।
दत्तात्रेय होसबले के इस बयान के तुरंत बाद शिवसेना ठाकरे गुट की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने मीडिया से बात करते हुए उन पर तीखा हमला बोला। प्रियंका ने तंज कसते हुए कहा, सबसे पहले तो मैं कहूंगी कि फाइनली आरएसएस के कानों तक यह खबर पहुंची कि इतना बड़ा महापाप हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह चोरी उन्हीं लोगों के संरक्षण में या उनके द्वारा की गई है जिन्होंने भगवान श्री राम मंदिर के नाम पर अपनी पूरी राजनीति चमकाई थी।
प्रियंका चतुर्वेदी ने इस घटना को केवल एक मामूली चोरी मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने इसे महापाप करार देते हुए कहा कि भगवान के मंदिर से पैसे, जवाहरात और यहां तक कि चांदी की ईंटें लूट ली गईं। उन्होंने जांच प्रक्रिया पर संदेह जताते हुए कहा कि स्थानीय एसआईटी ने केवल छुटभइयों को पकड़ा है, जबकि इस साजिश के पीछे जो मेन पर्सन हैं, उन्हें पूरी तरह से छूट दे दी गई है।
प्रियंका ने भाजपा पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि सत्ताधारी दल ने सोचा था कि मंदिर का राजनीतिक फायदा उठाने के बाद उसे उसके हाल पर छोड़ देंगे, लेकिन अब जनता और सनातनियों में भारी आक्रोश है। उन्होंने मांग की कि अगर संघ वाकई आहत है, तो उन्हें केवल बयानबाजी नहीं करनी चाहिए, बल्कि उन बड़े नामों पर कार्रवाई की मांग करनी चाहिए जो इसके असली सूत्रधार हैं।
जहां एक तरफ दत्तात्रेय होसबले इसे राम भक्तों की आस्था का विषय बताकर संयम की अपील कर रहे हैं, वहीं प्रियंका चतुर्वेदी ने इसे भ्रष्टाचार और राजनीतिक अवसरवाद का सबसे बड़ा उदाहरण बना दिया है। अयोध्या राम मंदिर चंदा चोरी का यह विवाद अब केवल पुलिसिया जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आगामी राजनीति की दिशा तय करने वाला एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। अब देखना यह होगा कि क्या जांच की आंच उन बड़े चेहरों तक पहुंचती है जिनका जिक्र विपक्ष लगातार कर रहा है।