

Mumbai Politics Shiv Sena UBT Jolt Sunil Shinde Worli: महाराष्ट्र की राजनीति में मंगलवार को उस समय बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और विधायक सचिन अहिर ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट का दामन थाम लिया। इसके साथ ही उन्होंने विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए नामांकन भी दाखिल कर दिया। इस घटनाक्रम को शिवसेना (यूबीटी) के लिए बड़ा राजनीतिक और संगठनात्मक झटका माना जा रहा है।
सचिन अहिर की वर्ली विधानसभा क्षेत्र में मजबूत राजनीतिक पकड़ रही है। उनके पार्टी छोड़ने से ठाकरे गुट को संगठनात्मक स्तर पर नुकसान होने की चर्चा तेज हो गई है। इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले यूबीटी विधायक सुनील शिंदे ने भी पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि वरिष्ठ नेताओं को अब आत्ममंथन करने की जरूरत है। उनके इस बयान ने पार्टी के भीतर असंतोष की अटकलों को और बल दिया है।
शिवसेना (यूबीटी) के विधान परिषद सदस्य अंबादास दानवे ने बताया कि सोमवार देर रात तक सचिन अहिर उनके साथ मौजूद थे और सामान्य बातचीत चल रही थी। उस समय किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि अगले ही दिन वह राजनीतिक फैसला बदल देंगे।
दानवे के मुताबिक, मंगलवार सुबह करीब 11:30 बजे सचिन अहिर का अंग्रेजी में एक संदेश मिला, जिसमें उन्होंने लिखा कि अपने राजनीतिक अस्तित्व को बनाए रखने के लिए उन्हें कुछ महत्वपूर्ण फैसले लेने पड़ रहे हैं। दानवे ने कहा कि अब यह समझना होगा कि आखिर किन परिस्थितियों में उन्होंने यह कदम उठाया।
अंबादास दानवे ने बताया कि शिवसेना यूबीटी ने विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए जगन्नाथ अभ्यंकर को अपना उम्मीदवार बनाया है। इस पद के लिए 1 जुलाई को मतदान होना है। ऐसे में सचिन अहिर के शिंदे गुट में शामिल होने और उपसभापति पद के लिए नामांकन दाखिल करने से चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।
सचिन अहिर के पाला बदलने और सुनील शिंदे के सार्वजनिक बयान ने शिवसेना (यूबीटी) के भीतर चल रही राजनीतिक हलचल को खुलकर सामने ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी नेतृत्व इन घटनाक्रमों पर क्या रणनीति अपनाता है और इसका महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।