नवी मुंबई में गुलाबी बहार! नेरुल के वेटलैंड्स पर उतरा हजारों फ्लेमिंगो का झुंड; देखें प्रकृति का यह नजारा

Nerul Wetlands Update: नेरुल इलाका इन दिनों गुलाबी और सफेद रंग की खूबसूरत चादर से ढक गया है। हजारों की संख्या में पहुंचे प्रवासी फ्लेमिंगो पक्षियों ने इस भूमि को एक अद्भुत पर्यटन स्थल में बदल दिया है।
A Pink Spectacle in Navi Mumbai! A Flock of Thousands of Flamingos Descends upon the Nerul Wetlands; Witness This Natural Spectacle
नवी मुंबई वेटलैंड फ्लेमिंगो हैबिटैट (सौ. सोशल मीडिया )
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Migratory Flamingos In Nerul Wetlands: सपनों के शहर मुंबई और उसके पड़ोसी क्षेत्र नवी मुंबई से इन दिनों प्रकृति का एक ऐसा विहंगम दृश्य सामने आ रहा है, जिसे देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध है। नवी मुंबई के नेरुल (Nerul) इलाके में स्थित आर्द्रभूमि (wetlands) पूरी तरह से गुलाबी और सफेद रंग की जीवित चादर में तब्दील हो गई है। इसका कारण और कोई नहीं, बल्कि हर साल हजारों मील की दूरी तय कर यहां पहुंचने वाले खूबसूरत प्रवासी फ्लेमिंगो (राजहंस/Flamingos) पक्षी हैं। इन हजारों मेहमान पक्षियों ने मिलकर इस पूरे शहरी वेटलैंड को देश के सबसे शानदार और बड़े मौसमी पर्यटन केंद्रों में से एक बना दिया है।

हर तरफ बिखरी है कुदरत की खूबसूरती

नेरुल के तालाबों और मैंग्रोव क्षेत्रों का नजारा इस समय देखने लायक है। जब हजारों की संख्या में ये पक्षी एक साथ आसमान में अपने सफेद और हल्के गुलाबी पंखों को फड़फड़ाते हुए उड़ान भरते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे नीले आसमान में कोई जादुई कैनवास घूम रहा हो। वहीं, जब ये पक्षी भोजन की तलाश में नेरुल के शांत पानी में उतरते हैं, तो उनकी शारीरिक रंगत के कारण पानी का रंग भी झिलमिलाता हुआ चमकीला गुलाबी दिखाई देने लगता है। प्रकृति के इस अनोखे रंग-रूप को अपने कैमरों और यादों में कैद करने के लिए पूरे महाराष्ट्र और देश के अन्य हिस्सों से पर्यटकों, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स (Photographers) और पक्षी प्रेमियों (Bird Lovers) का सैलाब यहां उमड़ पड़ा है।

गुजरात और विदेशों से क्यों आते हैं ये खास मेहमान?

वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों के अनुसार, ये राजहंस मुख्य रूप से गुजरात के कच्छ के रण (Rann of Kutch) और कुछ प्रजातियां विदेशों (जैसे साइबेरिया या मध्य एशिया) से लंबी दूरी की यात्रा तय करके मुंबई और नवी मुंबई के तटीय इलाकों में आती हैं। नेरुल के उथले पानी और आर्द्रभूमि में विशेष प्रकार के नीले-हरे शैवाल (Blue-Green Algae) और छोटे जलीय जीव प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इन शैवालों को खाने की वजह से ही फ्लेमिंगो पक्षियों के पंखों का रंग इतना गहरा और आकर्षक गुलाबी हो जाता है।

पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा

यह मौसमी घटना न केवल मुंबईकरों को मानसिक शांति और पर्यटन का अवसर देती है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि शहरीकरण के बावजूद नवी मुंबई के इन वेटलैंड्स का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) अभी भी जीवित है। स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को नेरुल के इस हिस्से को आधिकारिक तौर पर एक संरक्षित पक्षी अभयारण्य के रूप में और अधिक विकसित करना चाहिए, ताकि इन बेजुबान विदेशी मेहमानों का आशियाना हमेशा सुरक्षित रहे। यदि आप भी प्रकृति की इस जादुई खूबसूरती को लाइव देखना चाहते हैं, तो यह सीजन नेरुल वेटलैंड्स जाने के लिए सबसे मुफीद समय है।

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