वीडियो कॉल के जरिए दिया तलाक, मुंबई पुलिस ने पति और ससुराल वालों के खिलाफ किया मामला दर्ज

मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत भारत में तीन तलाक कानूनी अपराध है, जिसमें कोई भी मुस्लिम व्यक्ति अपनी पत्नी से तीन बार तलाक बोलकर उससे तलाक नही ले सकता।
वीडियो कॉल के ज़रिए तीन तलाक़
वीडियो कॉल के ज़रिए तीन तलाक़ (सौजन्य-सोशल मीडिया, कंसेप्ट फोटो)
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नवी मुंबई: मुंबई में एक महिला ने अपने पति के खिलाफ तीन तलाक के जरिए तलाक देने का आरोप लगाया है। एक महिला ने अपने पति और ससुराल वालों पर दहेज़ की मांग को लेकर उत्पीड़न करने और वीडियो कॉल पर तीन तलाक़ के ज़रिए तलाक़ देने का आरोप लगाया है।

मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत मामला दर्ज किया गया है। मुंबई पुलिस ने यूनाइटेड किंगडम (यूके) में काम करने वाले एक व्यक्ति और उसके माता-पिता के ख़िलाफ़ दहेज़ के लिए अपनी पत्नी को परेशान करने और वीडियो कॉल पर तीन तलाक़ के ज़रिए तलाक़ देने का मामला दर्ज किया है।

सीवुड्स की रहने वाली पीड़िता ने एनआरआई सागर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए।

पीड़िता ने लगाया आरोप

एएनआई से बात करते हुए, पीड़िता ने आरोप लगाया कि 2022 में आकिब भाटीवाला से उसकी शादी, जो मुस्लिम रीति-रिवाज़ों के अनुसार हुई थी, शुरू में शांतिपूर्ण लग रही थी। हालांकि, वडाला में अपने ससुराल वालों के घर में जाने के बाद, उत्पीड़न शुरू हो गया। मामला तब और बिगड़ गया जब वह अपने पति और ससुराल वालों के साथ यूके चली गई, जहां कथित तौर पर दुर्व्यवहार जारी रहा।

पीड़िता ने दावा किया कि घरेलू विवाद के बाद, उसके पति ने उसके गहने जब्त कर लिए और उसे भारत वापस भेज दिया, जिससे उसका संपर्क टूट गया। इसके बाद, उसे वीडियो कॉल के दौरान ट्रिपल तलाक के ज़रिए तलाक मिल गया। ब्रिटेन लौटने के बाद भी, पीड़िता का दावा है कि उसे अपने पति के घर में प्रवेश से वंचित कर दिया गया।

भारत में माना गया आपराधिक कृत्य

उसकी शिकायत के आधार पर, अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। ट्रिपल तलाक इस्लामी कानून के तहत तलाक की प्रक्रिया है, जहां एक पति अपनी पत्नी को तीन बार 'तलाक' बोलकर तलाक दे सकता है। अगस्त 2017 में, 5 जजों की सुप्रीम कोर्ट बेंच ने माना कि तलाक-ए-बिद्दत या ट्रिपल तलाक की प्रथा 'स्पष्ट रूप से मनमाना' और असंवैधानिक है।

2019 में, संसद ने मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 पारित किया, जिसने तलाक-ए-बिद्दत की प्रथा को एक आपराधिक कृत्य बना दिया, जिसके लिए तीन साल तक की कैद की सज़ा हो सकती है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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