Mumbai में बनेंगे 4 नए हेलीपैड, आपात सेवाओं और ट्रैफिक राहत को मिलेगा बढ़ावा

Mumbai में अगले छह वर्षों में चार नए हेलीपैड बनाए जाएंगे। इनका उद्देश्य एयर एम्बुलेंस और आपातकालीन सेवाओं को तेज करना है, साथ ही शहर के ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को मजबूत करना है।
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मुंबई में हैलीपैड (सौ. सोशल मीडिया )
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Mumbai New Heliports BMC: मुंबई को भविष्य के लिए तैयार करने और बहु-मोडल परिवहन नेटवर्क विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए शहर में अगले छह वर्षों में चार नए हेलीपैड बनाए जाएंगे। इन हेलीपैड का निर्माण बीएमसी और एमएमआरडीए की तरफ से किया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, इनका मुख्य उद्देश्य आपातकालीन सेवाओं जैसे एयर एम्बुलेंस और आपदा के समय निकासी को तेज और प्रभावी बनाना है। प्रस्ताव के तहत दो हेलीपैड बीएमसी द्वारा मुंबई कोस्टल रोड परियोजना के उत्तर और दक्षिण दिशा वाले हिस्सों के पास बनाए जाएंगे।

Mumbai के वर्ली इलाके में बनेगा हैलीपैड

दक्षिण मुंबई के वर्ली इलाके में बनने वाले हेलीपैड का ठेका रेमंड ग्रुप को दिया जा चुका है, जहां पहले एक जेट्टी हुआ करती थी। वहीं, दूसरा हेलीपैड कांदिवली के चारकोप इलाके में प्रस्तावित है, जो कोस्टल रोड के उत्तरी हिस्से के पास होगा। दूसरी ओर, एमएमआरडीए द्वारा मुंबई के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) में दो हेलीपैड बनाए जा रहे - हैं। इनका निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और अगले पांच वर्षों में इन्हें पूरा कर लिया जाएगा।

तेजी से विकसित हो रहे हाई-स्पीड कॉरिडोर

  • अधिकारियों का कहना है कि मुंबई में कोस्टल रोड और गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड जैसे हाई-स्पीड कॉरिडोर तेजी से विकसित हो रहे हैं। ऐसे में हेलीपैड़ शहर में तेज, सुगम और निर्वाध यातायात के लिए एक अतिरिक्त विकल्प प्रदान करेंगे। खास बात यह है कि ये परियोजनाएं पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपी पी) मॉडल पर आधारित होगी, जिसमें निजी ठेकेदार निवेश करेंगे और राजस्व साझा किया जाएगा।
  • हालांकि, मुंबई में पहले भी हेलीपैड विकसित करने की कोशिशें हुई है। 2014 में महालक्ष्मी रेसकोर्स पर हेलीपोर्ट को अपग्रेड करने का प्रस्ताव आया था, लेकिन विरोध के चलते यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। इसके अलावा, कई ऊंची इमारतों पर बने निजी हेलीपैड भी आज उपयोग में नहीं हैं।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में हेलीपैड संचालन के लिए एक स्पष्ट और एकीकृत नीति बनाना जरूरी है, ताकि इनका उपयोग केवल वीआईपी तक सीमित न रहकर आम नागरिकों के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकें।
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