बीएमसी स्कूलों में 'मिशन एडमिशन’, पांच दिनों में 11,500 बच्चों को मिला प्रवेश

BMC Mission Admission
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मुंबई: अप-टू-डेट और शैक्षणिक सुविधाओं से सुसज्जित बीएमसी (BMC) के मुंबई पब्लिक स्कूलों (Mumbai Public Schools) में छात्रों के प्रवेश लेने की होड़ मची हुई है। बीएमसी ने मिशन एडमिशन के तहत इस वर्ष 1 लाख नए छात्रों (New Students) के प्रवेश (Admission) का लक्ष्य रखा है, जबकि इन स्कूलों में 18 अप्रैल 2022  से प्रवेश प्रक्रिया की शुरुआत हो गई है। अब तक मात्र 5 दिनों में 11 हजार 549 छात्रों ने प्रवेश लिया है।

बीएमसी शिक्षा विभाग मुंबई में मराठी, हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और गुजराती जैसे 8 भाषाओं के स्कूल संचालित करता है। वर्तमान में नर्सरी से लेकर दसवीं कक्षा तक के करीब 1,150 स्कूलों में 3 लाख से ज्यादा छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। बीएमसी स्कूलों में छात्रों की संख्या लगातार घट रही थी, लेकिन पिछले साल की तुलना में इस वर्ष प्रवेश लेने वाले 29 हजार छात्र बढ़े हैं। सीबीएसई (CBSE) और मुंबई पब्लिक स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार को देखते हुए बच्चों के परिजन बीएसमी स्कूलों की तरफ आकर्षित हुए हैं।

प्रवेश प्रक्रिया 31 जुलाई तक जारी रहेगी

बीएमसी स्कूलों में मुख्य रूप से किंडरगार्टन से लेकर पहली और दूसरी कक्षा में परिजन प्राथमिकता दे रहे हैं। बीएमसी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को उम्मीद है कि जैसे-जैसे अलग-अलग स्कूलों में कक्षाओं का परिणाम बढ़ेगा, वैसे ही मुंबई पब्लिक स्कूल के अन्य कक्षाओं में प्रवेश लेने वाले बच्चों की संख्या में भी वृद्धि होगी। अधिकारी ने बताया कि बीएमसी के विद्यालयों में नियमित प्रवेश प्रक्रिया 31 जुलाई तक जारी रहेगी।

सौ फीसदी हुआ बीएमसी का रिजल्ट

बीएमसी कक्षा एक से लेकर 10वीं तक के बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करता है। बीएमसी स्कूलों में 10वीं (एसएससी) की बोर्ड परीक्षा का परिणाम 2019 में 53.14 फीसदी से 2020 में 93.25 फीसदी और 2021 में 100 फीसदी हो गया है। बीएमसी देश भर में अकेली महानगरपालिका है जो 8 भाषाओं में बच्चों को शिक्षा देती है। इसमें स्वतंत्र संगीत, कला, कार्य अनुभव, स्काउट-गाइड के भी विभाग हैं।

ऐसे सुसज्जित हुए बीएमसी के स्कूल

बीएमसी स्कूलों में वर्चुअल क्लासरूम के जरिए शिक्षा दी जाती है। बैक पैक के बोझ को कम करने के लिए टैब के माध्यम से शैक्षिक गतिविधियां शुरू की गई हैं। सभी क्लासरूम डिजिटल होते जा रहे हैं। पुस्तकालयों से परे, कंप्यूटर प्रयोगशालाएं, विज्ञान प्रयोगशालाएं, खगोल विज्ञान प्रयोगशालाएं, भाषा प्रयोगशालाएं, टिंकरिंग प्रयोगशालाएं, लघु विज्ञान केंद्र, विज्ञान जिज्ञासा भवन शुरू किए गए हैं। अप-टू-डेट डेस्क, बेंच, साउंड सिस्टम शिक्षण को आसान बनाते हैं।

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