मंत्री आशीष शेलार ने गणेशोत्सव गीत और पोर्टल का किया शुभारंभ, नागरिकों से भागीदारी की अपील

Mumbai News: मंत्री आशीष शेलार ने गणेशोत्सव गीत व पोर्टल का शुभारंभ कर नागरिकों व दिव्यांगजनों से घर बैठे दर्शन व भागीदारी की अपील की। राज्यभर में उत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।
आशिष शेलार, गणेशोत्सव पोर्टल का शुभारंभ (pic credit; social media)
आशिष शेलार, गणेशोत्सव पोर्टल का शुभारंभ (pic credit; social media)
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Maharashtra News: महाराष्ट्र में इस वर्ष पहली बार सार्वजनिक और घरेलू गणेशोत्सव को राजकीय उत्सव का दर्जा दिया गया है। इस विशेष अवसर पर राज्य सरकार ने व्यापक स्तर पर कार्यक्रमों और गतिविधियों का आयोजन करने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में राज्य के सांस्कृतिक कार्य विभाग ने एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल ganeshotsav.pldmka.co.in लॉन्च किया है, ताकि महाराष्ट्र का हर नागरिक घर बैठे गणेशोत्सव का आनंद ले सके और इसमें अपनी सहभागिता दर्ज करा सके।

राज्य के सांस्कृतिक कार्य मंत्री एड. आशीष शेलार ने बांद्रा स्थित महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) सभागृह में इस पोर्टल और विशेष गीत “आला रे आला... राज्य महोत्सव आला...” का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव महाराष्ट्र की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का प्रतीक है और सरकार चाहती है कि इस महोत्सव में हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी हो।

मंत्री शेलार ने लोगों से भागीदारी की अपील

शेलार ने अपील करते हुए कहा कि आम नागरिकों के साथ-साथ दिव्यांगजन भी इस पोर्टल के माध्यम से घर बैठे गणेशोत्सव के दर्शन कर सकेंगे। उन्होंने इसे एक समावेशी पहल बताते हुए नागरिकों से बड़ी संख्या में पंजीकरण करने और उत्सव का हिस्सा बनने की अपील की।

इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्य विभाग की सचिव डॉ. किरण कुलकर्णी, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रधान सचिव पराग जैन नैनुतिया, पी.एल. देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी की निदेशक मीनल जोगलेकर और सांस्कृतिक कार्य विभाग के निदेशक विभीषण चावरे उपस्थित रहे।

राज्य सरकार के इस प्रयास का उद्देश्य गणेशोत्सव को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। पोर्टल के माध्यम से राज्य के विभिन्न जिलों में आयोजित गणेशोत्सव की झलकियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम, स्पर्धाएं और प्रतियोगिताओं की जानकारी नागरिकों तक पहुंचाई जाएगी।

शेलार ने कहा कि यह कदम न केवल महाराष्ट्र की परंपराओं को संरक्षित करेगा बल्कि नई पीढ़ी को भी गणेशोत्सव के महत्व से जोड़ेगा।

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