मोतीलाल नगर पुनर्विकास: म्हाडा ने किया बड़ा ऐलान, परियोजना का पूरा नियंत्रण रहेगा अपने पास

Mumbai Mhada News: म्हाडा ने गोरेगांव के मोतीलाल नगर पुनर्विकास प्रोजेक्ट पर रुख साफ करते हुए कहा कि अधिकार उसी के पास रहेगा। 3500+ निवासियों को मिलेंगे 1600 sqft के बड़े फ्लैट।
MHADA clarified its full control over Goregaon's Motilal Nagar redevelopment, assuring over 3,500 residents of in-situ rehabilitation with 1600 sq ft flats.
म्हाडा (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Mhada Motilal Nagar Redevelopment Goregaon: देश के सबसे बड़ी 'ब्राउनफील्ड' आवास पुनर्विकास प्रोजेक्ट माने जाने वाली गोरेगांव पश्चिम स्थित मोतीलाल नगर 1, 2 और 3 पुनर्विकास परियोजना को लेकर लोगों के बीच भरोसा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र गृहनिर्माण व क्षेत्रविकास प्राधिकरण (म्हाडा) ने एक बार फिर अपनी भूमिका स्पष्ट की है। म्हाडा ने साफ किया है कि इस परियोजना का पूरा अधिकार, नियंत्रण, दायित्व और सभी निर्णय लेने का अधिकार केवल म्हाडा के पास रहेगा।

परियोजना के लिए नियुक्त कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट एजेंसी अदाणी समूह की एस्टेटव्यू डेवलपर्स सिर्फ म्हाडा के निर्देशों और टेंडर की शर्तों के अनुसार ही काम करेगी। म्हाडा ने मोतीलाल नगर के 3,500 से अधिक रहिवासियों को भेजे गए पत्र में कहा है कि पुनर्विकास की पूरी प्रक्रिया में हर पात्र निवासी के अधिकार और हितों को प्राथमिकता दी जाएगी।

सभी काम पूरी पारदर्शिता, कानूनी प्रक्रिया और सही योजना के तहत किए जाएंगे। परियोजना के हर चरण की निगरानी, नियंत्रण और अंतिम जिम्मेदारी म्हाडा की ही रहेगी। पत्र में लोगों से अपील की गई है कि परियोजना को सफल बनाने के लिए वे म्हाडा और एस्टेटव्यू डेवलपर्स का सहयोग करें।

1600 वर्गफीट के मिलेंगे बड़े फ्लैट

म्हाडा ने इस पत्र के साथ परियोजना का मास्टर प्लान भी रहिवासियों को उपलब्ध कराया है। कम और मध्यम आय वर्ग के लोगों के लिए बनाए जा रहे इस 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाले प्रोजेक्ट का विकास गोरेगांव पश्चिम के 143 एकड़ क्षेत्र में किया जाएगा।

इसे मुंबई के योजनाबद्ध, आधुनिक और टिकाऊ शहरी विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में पहली बार निवासियों को 1600 वर्गफीट के बड़े सुसज्जित फ्लैट मिलेंगे। रहिवासियों को भेजे गए पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी पात्र रहिवासियों का पुनर्वास उनकी मूल जगह पर ही किया जाएगा।

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