

Devendra Fadnavis Decision: महाराष्ट्र की राजनीति और सामाजिक गलियारों से एक अत्यंत महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। फडणवीस सरकार ने मराठा समाज के हित में एक बड़ा और दूरगामी निर्णय लिया है। लंबे समय से चल रही मांगों और सामाजिक आंदोलनों के बीच, सरकार ने अब मराठा समाज के छात्रों को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के समान सुविधाएं और लाभ देने का रास्ता साफ कर दिया है। इस निर्णय के तहत, मराठा छात्रों को कुल 8 ऐसी सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलेगा जो अब तक मुख्य रूप से ओबीसी वर्ग के लिए ही आरक्षित थीं।
सरकार के इस फैसले से मराठा समाज के युवाओं के लिए शिक्षा और करियर के नए द्वार खुलेंगे। इन प्रमुख योजनाओं में मुख्य रूप से शामिल हैं:
यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो छात्र केंद्रीकृत प्रवेश प्रक्रिया (CAP) के बाद रिक्त सीटों पर प्रवेश लेते हैं, उन्हें भी ओबीसी छात्रों की तरह ही सभी शैक्षणिक रियायतें दी जाएंगी।
सरकार का यह निर्णय केवल वर्तमान तक सीमित नहीं है। आदेश के अनुसार, भविष्य में ओबीसी वर्ग के लिए जो भी नई शैक्षणिक सुविधाएं या योजनाएं लागू होंगी, वे स्वतः ही मराठा समाज पर भी लागू हो जाएंगी। यह कदम मराठा छात्रों को शैक्षणिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
जहाँ एक तरफ मराठा समाज में इस फैसले को लेकर सकारात्मक माहौल है, वहीं दूसरी तरफ ओबीसी नेताओं ने इस पर नाराजगी जाहिर की है। ओबीसी नेता लक्ष्मण हाके ने आरोप लगाया है कि सरकार मराठा समाज के लिए तो त्वरित निर्णय ले रही है, लेकिन महात्मा ज्योतिबा फुले और अहिल्यादेवी जैसे ओबीसी निगमों को पर्याप्त निधि आवंटित नहीं की जा रही है। इसके साथ ही, मनोज जरांगे पाटिल का आंदोलन और सरकार को दिया गया अल्टीमेटम भी इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में एक महत्वपूर्ण कारक बना हुआ है। यह निर्णय महाराष्ट्र की सामाजिक समरसता और आरक्षण की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ता नजर आ रहा है।