महाराष्ट्र ST किराया फिर बढ़ाने की तैयारी, 13.50% वृद्धि का प्रस्ताव, छुट्टे के विवाद खत्म करने की भी योजना

ST Bus Ticket Hike: महाराष्ट्र एसटी महामंडल ने बसों के किराए में 13.50% बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है। छुट्टे पैसे के विवाद को खत्म करने के लिए टिकट की दरें 5 के गुणक में तय की जाएंगी।
MSRTC proposes a 13.50% fare hike for ST buses to combat rising operational costs. Ticket prices are recommended to be rounded off to multiples of Rs 5.
एसटी बस (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Maharashtra ST Bus Fare Hike: महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल (एसटी) ने 13.50 प्रतिशत किराया बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया है। परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) की बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय होने की संभावना है। इस वर्ष 15 अप्रैल से 15 जून तक एसटी बसों में 10 प्रतिशत अस्थायी किराया वृद्धि लागू की गई थी। इसके बाद इस बढ़ोतरी को 15 जुलाई तक बढ़ाया गया था। अब इसकी अवधि समाप्त होने के बाद महामंडल ने नई किराया वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया है।

मंजूरी मिलने पर वर्तमान 10 प्रतिशत वृद्धि बढ़कर कुल 13.50 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। महामंडल ने इस बार किराया व्यवस्था में एक और बदलाव का प्रस्ताव रखा है। यात्रियों और कंडक्टरों के बीच छुट्टे पैसे को लेकर होने वाले विवादों को खत्म करने के लिए एसटी टिकटों की कीमत 5 रुपये के गुणक में रखने की सिफारिश की गई है।

महामंडल का कहना है कि इससे यात्रियों और वाहकों दोनों को छुट्टे पैसे की परेशानी कम होगी। कर्मचारियों के विभिन्न भत्तों में वृद्धि, डीजल की बढ़ती कीमतें, टायर और बसों के स्पेयर पार्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण परिवहन खर्च काफी बढ़ गया है।

किराया बढ़ने के बाद भी आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं

हालांकि केवल किराया बढ़ाने के बावजूद एसटी महामंडल की आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। मई महीने में एसटी का परिवहन राजस्व 1,047.17 करोड़ रुपये रहा, जबकि खर्च 1,096.07 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

राज्य के कुल 31 विभागों में से 22 विभाग अपना खर्च तक पूरा नहीं कर पाए है। इससे पहले जनवरी 2025 में मुंबई एसटी किराए में 14.95 प्रतिशत वृद्धि की गई थी। अब यदि नए प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो नए किराया दर जल्द ही लागू होने की संभावना है।

बढ़ती लागत से बढ़ा वित्तीय दबाव

महामंडल के अनुसार कर्मचारियों के विभिन्न भत्तों में बढ़ोतरी, डीजल की कीमतों में वृद्धि, टायर और बसों के स्पेयर पार्ट्स महंगे होने के कारण परिचालन लागत लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि किराया बढ़ाने की जरूरत महसूस की गई है।

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