

Maharashtra Land Partition Rule News Update: महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के हित में एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब पैतृक कृषि भूमि के बंटवारे की प्रक्रिया को सरल और बेहद सस्ता बना दिया गया है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
राजस्व विभाग के इस फैसले के तहत किसान अब महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता 1966 की धारा 85 के अंतर्गत केवल 100 रुपये के नाममात्र शुल्क में जमीन का बंटवारा करवा सकेंगे। यह प्रक्रिया उप-निबंधक कार्यालय के माध्यम से सीधे पूरी की जा सकेगी।
पहले इस प्रक्रिया में किसानों को 15 हजार से 30 हजार रुपये तक खर्च करना पड़ता था। संपत्ति के मूल्यांकन पर 1 प्रतिशत स्टाम्प शुल्क लगाया जाता था, जिससे बंटवारा महंगा और जटिल हो जाता था। अब सरकार ने इस शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
नई व्यवस्था में किसानों के पास दो विकल्प होंगे-वे चाहें तो उप-निबंधक कार्यालय के माध्यम से बंटवारा करा सकते हैं या फिर तहसीलदार के जरिए भी यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इससे प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक और सुलभ बनेगी।
बंटवारे के बाद तहसीलदार द्वारा भूमि रिकॉर्ड यानी 7/12 उतारे में वारिसों के नाम दर्ज किए जाएंगे। पहले इस प्रक्रिया में काफी समय लगता था, लेकिन अब इसे तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
नई प्रणाली के तहत उप-निबंधक कार्यालय से ऑनलाइन 7/12 उतारे पर नाम दर्ज किए जाएंगे। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसानों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
भू-अभिलेख विभाग अब तीन महीने के भीतर प्रत्येक वारिस को उसके हिस्से का स्वतंत्र नक्शा उपलब्ध कराएगा। इस फैसले से किसानों के समय और पैसे दोनों की बचत होगी और भूमि विवादों में भी कमी आने की उम्मीद है।