महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: पिंक ई-रिक्शा योजना में अनुदान बढ़कर 40% हुआ, अब 5,000 महिलाओं को मिलेगा लाभ

Maharashtra Pink E Rickshaw: महाराष्ट्र सरकार ने पिंक ई-रिक्शा योजना में सरकारी अनुदान 20% से बढ़ाकर 40% कर दिया है। 8 जिलों में लागू इस योजना के तहत लाभार्थियों को 10% अंशदान देना होगा।
Maharashtra government increased the Pink E-Rickshaw Scheme subsidy to 40% for 5,000 women across 8 districts to boost self-employment and safe transport.
पिंक ई-रिक्शा योजना (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Maharashtra Pink E Rickshaw Scheme: महाराष्ट्र सरकार ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने पिंक ई-रिक्शा योजना में संशोधन करते हुए सरकारी अनुदान को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया है।

हालांकि, योजना के तहत लाभार्थियों की संख्या 10,000 से घटाकर 5,000 कर दी गई है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार, आर्थिक सशक्तिकरण और सुरक्षित आजीविका के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

सरकार देगी ई-रिक्शा की कीमत का 40 प्रतिशत

महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी शासनादेश (GR) के अनुसार, योजना के तहत ई-रिक्शा खरीदने वाली पात्र महिलाओं को वाहन की कुल कीमत का 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार अनुदान के रूप में देगी। शेष 60 प्रतिशत राशि लाभार्थी को वहन करनी होगी।

10% स्वयं का अंशदान, बाकी ऋण की सुविधा

नई व्यवस्था के अनुसार लाभार्थी को कुल लागत का कम से कम 10 प्रतिशत स्वयं जमा करना होगा। बची हुई राशि आपूर्तिकर्ता कंपनी की ब्याज-मुक्त 'पार्शियल डिफर्ड पेमेंट फैसिलिटी' या सहकारी, राष्ट्रीयकृत अथवा सरकार द्वारा अनुमोदित निजी बैंकों से ऋण लेकर जुटाई जा सकेगी। इससे महिलाओं पर एकमुश्त आर्थिक बोझ कम होने की उम्मीद है।

8 जिलों के प्रमुख शहरों में लागू होगी योजना

पिंक ई-रिक्शा योजना फिलहाल महाराष्ट्र के आठ जिलों के प्रमुख शहरों में लागू की जा रही है। योजना का उद्देश्य महिलाओं और बालिकाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना, उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना तथा सुरक्षित आजीविका सुनिश्चित करना है।

रोजगार और आत्मनिर्भरता को मिलेगा बढ़ावा

महाराष्ट्र सरकार का मानना है कि बढ़ी हुई सब्सिडी से अधिक जरूरतमंद महिलाएं स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ा सकेंगी। पिंक ई-रिक्शा योजना महिलाओं को सार्वजनिक परिवहन क्षेत्र में अवसर देने के साथ उनकी आय बढ़ाने और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम पहल मानी जा रही है। इससे राज्य में महिला उद्यमिता और सुरक्षित रोजगार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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