CM फडणवीस ने कहा -138 फास्ट ट्रैक कोर्ट में सिर्फ 58 ही शुरू, जजों की नियुक्ति के लिए हाईकोर्ट से संपर्क जारी

Bombay High Court: महाराष्ट्र में 138 स्वीकृत फास्ट-ट्रैक कोर्ट में से केवल 58 ही कार्यरत हैं। सीएम फडणवीस ने कहा कि हाईकोर्ट के साथ मिलकर जजों की खाली पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है।
CM Devendra Fadnavis informed the assembly that only 58 out of 138 sanctioned fast-track courts are functional in Maharashtra due to a shortage of judges
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Maharashtra Assembly Updates Devendra Fadnavis: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को विधानसभा में बताया कि राज्य में स्वीकृत 138 फास्ट-ट्रैक अदालतों में से फिलहाल केवल 58 अदालतें ही काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बंबई उच्च न्यायालय के साथ समन्वय कर बाकी अदालतों के लिए न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कराने का प्रयास कर रही है। फडणवीस ने स्पष्ट किया कि न्यायाधीशों की नियुक्ति पूरी तरह न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में आती है। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में राज्य सरकार ने स्वीकृत अदालतों में जजों की नियुक्ति को लेकर मुख्य न्यायाधीश से कई बार बैठकें की हैं और आधिकारिक पत्राचार भी किया है।

भाजपा विधायक राहुल कुल के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च न्यायालय ने सरकार को जानकारी दी है कि न्यायाधीशों की भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। प्रक्रिया पूरी होते ही सभी स्वीकृत फास्ट ट्रैक अदालतों में न्यायाधीश नियुक्त कर दिए जाएंगे। विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने भी निचली अदालतों में बड़ी संख्या में खाली पदों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे न्याय मिलने में देरी हो रही है।

वहीं, गृह मंत्री का प्रभार संभाल रहे फडणवीस ने जलगांव जामोद में एक महिला के लापता होने के मामले में पुलिस की लापरवाही स्वीकार की। उन्होंने कहा कि जांच में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की गंभीर गलतियां सामने आई हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और इस मामले की जांच तीन महीने के भीतर पूरी कर ली जाएगी।

विप में उठा चैरिटी अस्पतालों का मुद्दा

महाराष्ट्र विधान परिषद में चैरिटी अस्पतालों की अनियमितताओं का मुद्दा मंगलवार को जोरशोर से उठा, लेकिन चर्चा के दौरान सदन में मंत्रियों के अधिकार क्षेत्र को लेकर भी तीखी बहस देखने को मिली। सदस्य अनिल परब ने सवाल उठाया कि जिस विभाग का जवाब राज्यमंत्री माधुरी मिसाल को देना था, उसका जवाब मंत्री शंभूराज देसाई क्यों दे रहे हैं।

बृहन्मुंबई महानगरपालिका के अस्पतालों में गरीब मरीजों के लिए 15 प्रतिशत बेड आरक्षित रखने के सरकारी नियम का ग्लोबल अस्पताल द्वारा पालन नहीं किए जाने का मुद्दा शिवसेना (यूबीटी) के विधायक अनिल परब ने सदन में उठाया। उनके साथ परिणय फुके और चंद्रकांत रघुवंशी ने भी इस विषय पर सवाल पूछे। शुरुआत में राज्यमंत्री माधुरी मिसाल ने सदस्यों के सवालों के जवाब दिए, लेकिन इसके बाद मंत्री शंभूराज देसाई भी जवाब देने के लिए खड़े हुए।

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