हॉस्टल सब्सिडी घोटाला! 1 साल की बच्ची को बनाया छात्रा, CAG रिपोर्ट में 1.62 करोड़ के फर्जीवाड़े का खुलासा

CAG Report Maharashtra: महाराष्ट्र के अनुदानित छात्रावासों में फर्जी छात्र दिखाकर ₹1.62 करोड़ की सब्सिडी हड़पने का खुलासा। कैग रिपोर्ट में एक छात्रा की उम्र महज 1 साल दर्ज पाई गई।
CAG report exposes a ₹1.62 crore subsidy scam in Maharashtra's backward class hostels, revealing ghost students and gross lack of department inspection.
CAG Report Maharashtra (सोर्स-सोशल मीडिया)
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 Maharashtra Hostel Subsidy Scam: महाराष्ट्र में पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए संचालित अनुदानित छात्रावासों में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ छात्रावासों ने फर्जी छात्रों की संख्या दिखाकर सरकारी सब्सिडी हासिल की, जबकि कई मामलों में सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग ने बिना प्रत्यक्ष सत्यापन के ही अनुदान जारी कर दिया।

जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

कैग ने जालना, बुलढाणा और लातूर जिलों के छह अनुदानित छात्रावासों की जांच की। जांच में पाया गया कि कुछ छात्रावास बंद थे, जबकि कुछ स्थानों पर छात्र रह ही नहीं रहे थे। कई कमरों में विद्यार्थियों के बजाय लकड़ी और अन्य सामान रखा हुआ मिला। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एक छात्रावास के रिकॉर्ड में एक छात्रा की उम्र मात्र एक वर्ष दर्ज थी, जिससे लाभार्थियों के सत्यापन पर गंभीर सवाल उठे हैं।

1.62 करोड़ रुपये का अनुदान जारी

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 से 2024 के बीच इन छह छात्रावासों को कुल 1.62 करोड़ रुपये का सरकारी अनुदान दिया गया। कैग ने संकेत दिया है कि लाभार्थियों की सही जांच नहीं होने के कारण सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

2,388 छात्रावासों की जांच की सिफारिश

कैग ने आशंका जताई है कि राज्य के 2,388 अनुदानित छात्रावासों में भी इसी तरह की अनियमितताएं हो सकती हैं। रिपोर्ट में लाभार्थियों का नियमित सत्यापन, छात्रावासों का समय-समय पर भौतिक निरीक्षण और अनुदान वितरण प्रक्रिया में जवाबदेही तय करने की सिफारिश की गई है।

पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर

रिपोर्ट में कहा गया है कि छात्रावासों की नियमित निगरानी और डिजिटल सत्यापन व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत है, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक पात्र विद्यार्थियों तक पहुंचे। कैग की इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद सामाजिक न्याय विभाग की कार्यप्रणाली और अनुदान वितरण प्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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