फाॅन्ट छोटा था... मराठी के गलत उच्चारण पर घिरे विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर, विवाद बढ़ा तो मांगी माफी

Rahul Narwekar Apologized: महाराष्ट्र विधानसभा के मॉनसून में स्पीकर राहुल नार्वेकर ने शोक प्रस्ताव के दौरान मराठी शब्दों के गलत उच्चारण पर खेद जताया। उन्होंने इसे प्रिंटिंग की गड़बड़ी बताया।
Maharashtra Assembly Speaker Rahul Narwekar Expresses Regret over marathi mispronunciation
महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Maharashtra Assembly Speaker Rahul Narwekar Expresses Regret: महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने बुधवार को मानसून सत्र के पहले दिन सदन में शोक प्रस्ताव पढ़ते समय कुछ शब्दों का गलत उच्चारण करने पर खेद व्यक्त किया। नार्वेकर ने कहा कि यह अनजाने में हुई गलती तकनीकी समस्याओं और संबोधन की अस्पष्ट मुद्रित प्रति के कारण हुई थी तथा उनका किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था।

राहुल नार्वेकर ने कहा कि सोमवार को शोक प्रस्ताव पढ़ते समय कुछ तकनीकी त्रुटियों के कारण मुझसे कुछ शब्दों का गलत उच्चारण हो गया। मेरे पास उपलब्ध भाषण की मुद्रित प्रति स्पष्ट नहीं थी। जो कुछ हुआ, वह अनजाने में हुआ। यदि इससे किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं इसके लिए खेद व्यक्त करता हूं। मेरा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने कहा कि उन्हें मराठी भाषा पर भी उतना ही गर्व है। वह पहले भी कई बार मराठी में भाषण दे चुके हैं और सदस्यों से अनुरोध किया कि वे इसे भी ध्यान में रखें।

राहुल नार्वेकर ने क्यों मांगी माफी?

बता दें कि विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर का यह स्पष्टीकरण उस आलोचना के बीच आया, जिसमें महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन महान पार्श्व गायिकाओं आशा भोसले और सुमन कल्याणपुर तथा पूर्व विधायकों के लिए शोक प्रस्ताव पढ़ते समय कुछ मराठी शब्दों के गलत उच्चारण को लेकर सवाल उठाए गए थे।

मराठी के गलत उच्चारण पर क्या बोले राहुल नार्वेकर ?

बुधवार को विधानसभा में मराठी के गलत उच्चारण पर स्पष्टीकरण देते हुए राहुल नार्वेकर ने बताया कि हर साल विधानसभा के सत्र के पहले दिन शोक प्रस्ताव लिया जाता है। उन्होंने कहा कि इस साल बिजनेस एडवाइजरी कमेटी में बैठक में निर्णय लिया गया था कि शोक प्रस्ताव केवल अध्यक्ष पढ़कर बताएंगे। उसी का पालन करते हुए विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन सदन में मैंने शोक प्रस्ताव पढ़ा। इस बार 12 शोक प्रस्ताव थे।

शोक प्रस्ताव का फॉन्ट छोटा था

राहुल नार्वेकर ने कहा कि 12 शोक प्रस्ताव होने के कारण उसकी जो प्रिंट मेरे पास आई थी वह बहुत ही छोटे फॉन्ट में थी और अस्पष्ट थी। इस प्रस्ताव में कुछ तकनीकी गलतियां भी थी जो शुरुआत में नोट नहीं की गई थी। प्रस्ताव पढ़ते समय प्रिंट में जैसा था वैसा ही पढ़ा गया इसलिए गलती हुई।

पिछले पिछले चार-साढ़े चार साल से मैं इस सदन में विधानसभा अध्यक्ष के रूप में काम कर रहा हूं। इस दौरान मैंने कई भाषण मराठी भाषा में दिए। उन्होंने कहा कि सदन कार्यवाही में नियम हो या कार्य पद्धति मराठी में ही होती है। उन्होंने कहा कि मराठी भाषा का जितना सम्मान और अभिमान इस सदन में बैठे प्रत्येक सदस्य और महाराष्ट्र के प्रत्येक व्यक्ति को है। मराठी को लेकर उतना ही सम्मान और अभिमान मुझे भी है।

स्वर्गीय आशाताई भोसले की अवमानना करने वाली भाषा इस राज्य का कोई भी व्यक्ति नहीं कर सकता, और विधानसभा के अध्यक्ष तो इस तरह की बात कतई नहीं कर सकते। उस दिन जो भी हुआ वह एक गलती के कारण हुआ। इसका कोई दूसरा मतलब न निकाला जाए। उन्होंने कहा कि अगर इससे राज्य के किसी भी व्यक्ति या सदन के सदस्य की भावनाओं को ठेस पहुंची है तो मैं दिल से माफी मांगता हूं।

राज ठाकरे ने नार्वेकर की मराठी पर उठाए थे सवाल

मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने विधानसभा में प्रख्यात गायिका आशा भोसले के लिए शोक प्रस्ताव पढ़ते समय मराठी भाषा का गलत उच्चारण करने को लेकर विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर की कड़ी आलोचना की।

राज ठाकरे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट करते हुए राहुल नार्वेकर के कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने प्रसिद्ध गायक-अभिनेता और आशा भोसले के पिता दीनानाथ मंगेशकर का नाम ‘दीनदयाल मंगेशकर’ पढ़ दिया, लेकिन सदन में मौजूद किसी भी विधायक ने इस पर आपत्ति जताने की जरूरत नहीं समझी। यह शोक प्रस्ताव आशा भोसले के लिए नहीं, बल्कि ‘मराठी भाषा के लिए शोक प्रस्ताव’ जैसा था।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने तंज कसते हुए कहा कि यदि विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर यह प्रस्ताव स्वाहिली या हिब्रू भाषा में भी पढ़ते, तो शायद कोई खास फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उनकी मराठी वैसे भी किसी की समझ में नहीं आ रही थी।

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