Maharashtra में भ्रष्टाचार के आंकड़े चौंकाने वाले: महसूल विभाग सबसे आगे; 3 महीनों में 183 FIR, 262 गिरफ्तार

Maharashtra में जनवरी से मार्च 2026 के बीच भ्रष्टाचार के 183 मामले दर्ज हुए हैं। एसीबी के आंकड़ों में राजस्व विभाग सबसे आगे है, जबकि कई आरोपी अधिकारियों पर अब तक कार्रवाई लंबित है।
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महाराष्ट्र एसीबी (सौ. सोशल मीडिया )
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Maharashtra ACB Corruption Cases 2026: भ्रष्टाचार में महसूल विभाग और पुलिस के बीच चूहा-बिल्ली का खेल चलता है। इस खेल में महसूल विभाग हमेशा ही आगे रहा है, जाकी पुलिस डिपार्टमेंट दूसरे नंबर रहा है।

महाराष्ट्र भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों से पता चला है कि, जनवरी से मार्च 2026 तक राज्य में भ्रष्टाचार से संबंधित अधिकांश जालसाजी के मामले राजस्व और भूमि अभिलेख विभाग के अधिकारियों से संबंधित हैं। उसके बाद पुलिस, पंचायत समिति, शिक्षा विभाग और महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के अधिकारियों से संबंधित मामले हैं।

Maharashtra में 3 महीने में 183 FIR दर्ज किए गए

इसमें कुल 183 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 43 निजी व्यक्तियों सहित 262 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आंकड़ों के आगे के विश्लेषण से पता चला है कि 183 जालसाजी मामलों में शामिल अधिकांश अधिकारी तृतीय श्रेणी सरकारी अधिकारी (134) हैं। उसके बाद द्वितीय श्रेणी अधिकारी (37), प्रथम श्रेणी का (18) और चतुर्थ श्रेणी (07) हैं। आंकड़ों पर नजर डाले तो, इस वर्ष भ्रष्टाचार से संबंधित अधिकांश मामले राजस्व और भूमि अभिलेख विभाग (52) के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज किए गए।

संपत्ति जब्त करने की मांगी है अनुमति

एसीबी ने भ्रष्टाचार से जुडे तीन मामलों में सरकार को प्रस्ताव भेजकर आरोपी लोक सेवकों की 6।63 करोड रुपये की संपत्ति जब्त करने की अनुमति मांगी है। एसीबी के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि राज्य भर के 20 अलग-अलग सरकारी विभागों के कम से कम 208 अधिकारी, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए गए है। उन्हें अभी तक उनके संबंधित विभागों द्वारा निलंबित नहीं किया गया है। आंकड़ों से यह भी पता चला है कि निलंबित न किए गए अधिकारियों की अधिकतम संख्या ठाणे और मुंबई क्षेत्र से है।

आंकड़ों से यह भी पता चला है कि Maharashtra में भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपित विभिन्न विभागों के 28 सरकारी अधिकारियों को अभी तक बर्खास्त नहीं किया गया है। जांच से पता चला है कि 183 रिश्वतखोरी के मामलों में कुल रिश्वत की रकम 96 लाख रुपये है।

सबसे अधिक रिश्वत की रकम बिक्री कर विभाग के अधिकारियों से संबंधित है (20.55 लाख रुपये), इसके बाद पुलिस (14.68 लाख रुपये), लोक निर्माण विभाग (13.50 लाख रुपये), राजस्व और भूमि अभिलेख विभाग (7.05 लाख रुपये), वन विभाग (6.93 लाख रुपये), पंचायत समिति (6.79 लाख रुपये) और शिक्षा विभाग (4.44 लाख रुपये) का नंबर आता है, कई आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई लंबित है।

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