सुरक्षित शहरों की सूची में टॉप 5 में मुंबई, जानिए पहले स्थान पर है भारत का कौन सा शहर

Mumbai Top 5 Safe Cities NCRB: कोलकाता भारत का सबसे सुरक्षित शहर बना। मुंबई टॉप 5 में शामिल। महिला सुरक्षा और स्मार्ट पुलिसिंग में मुंबई ने किया बेहतर प्रदर्शन।
Mumbai Top 5 Safe Cities NCRB
Mumbai Top 5 Safe Cities NCRB प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स AI)
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India's Safest Cities List 2026: भारत में शहरीकरण की रफ्तार के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था का मुद्दा हमेशा चर्चा में रहता है। हाल ही में जारी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट और विभिन्न वैश्विक सुरक्षा सूचकांकों के विश्लेषण से एक सुखद तस्वीर सामने आई है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता ने एक बार फिर अपनी बादशाहत बरकरार रखते हुए भारत के सबसे सुरक्षित महानगर का खिताब अपने नाम किया है। वहीं, देश की आर्थिक राजधानी और सपनों के शहर मुंबई ने भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था में सुधार करते हुए देश के 'टॉप 5' सुरक्षित शहरों में अपनी जगह पक्की कर ली है। यह रैंकिंग प्रति लाख जनसंख्या पर दर्ज होने वाले संज्ञेय अपराधों (Cognizable Crimes) की दर के आधार पर तय की गई है, जिसमें कोलकाता और मुंबई जैसे शहरों ने दिल्ली और बेंगलुरु जैसे अन्य महानगरों को पीछे छोड़ दिया है।

सुरक्षा के इन मानकों पर खरे उतरने के लिए शहरों में न केवल अपराधों की संख्या कम होनी चाहिए, बल्कि पुलिस की सक्रियता और महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण का होना भी अनिवार्य है। कोलकाता में अपराध की दर अन्य महानगरों की तुलना में काफी कम (लगभग 84 प्रति लाख) पाई गई है, जबकि मुंबई अपनी विशाल और सघन आबादी के बावजूद चौथे स्थान पर मजबूती से खड़ा है। विशेष रूप से शहर के विभिन्न उपनगरों में 'स्मार्ट सर्विलांस' और 'निर्भया स्क्वॉड' की तैनाती ने अपराध नियंत्रण में अहम भूमिका निभाई है। पुणे और हैदराबाद जैसे शहर भी इस सूची में क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर काबिज हैं, जो यह दर्शाता है कि पश्चिम और दक्षिण भारत के शहर सुरक्षा के मामले में उत्तर भारतीय शहरों से कहीं आगे हैं।

कोलकाता की निरंतर सफलता और सामुदायिक पुलिसिंग

कोलकाता का लगातार तीसरे वर्ष पहले स्थान पर रहना कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि यह वहां की पुलिस व्यवस्था और सामाजिक ढांचे का परिणाम है। कोलकाता पुलिस की 'तेजस्विनी' जैसी पहलों ने महिलाओं को न केवल सशक्त बनाया है, बल्कि अपराधों की रिपोर्टिंग को भी आसान बनाया है। शहर की भौगोलिक बनावट ऐसी है कि वहां पुलिस थानों की पहुंच हर गली-मोहल्ले तक बेहद सघन है। इसके अलावा, कोलकाता में हिंसक अपराधों जैसे हत्या, डकैती और जबरन वसूली की दर राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। सामुदायिक पुलिसिंग के जरिए नागरिकों और पुलिस के बीच जो विश्वास कायम हुआ है, वह अपराधियों के लिए एक बड़ी बाधा साबित होता है।4

मुंबई की टॉप 5 में एंट्री और आधुनिक सुरक्षा तकनीक

मुंबई का इस सूची में चौथे स्थान पर आना एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह शहर कभी अंडरवर्ल्ड और गैंगवार के लिए जाना जाता था। आज का मुंबई अत्याधुनिक तकनीक और 'स्मार्ट पुलिसिंग' पर निर्भर है। मुंबई पुलिस ने पूरे शहर में 5,000 से अधिक हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क स्थापित किया है, जिसकी रियल-टाइम मॉनिटरिंग सीधे पुलिस मुख्यालय से की जाती है। शहर के व्यस्त व्यावसायिक और आवासीय इलाकों में पुलिस की गश्त और 'स्मार्ट सर्विलांस' के कारण झपटमारी और चोरी जैसी घटनाओं में भारी कमी आई है। इसके साथ ही, मुंबई लोकल ट्रेनों में महिला डिब्बों में विशेष सुरक्षा बलों की तैनाती ने सार्वजनिक परिवहन को महिलाओं के लिए देश में सबसे सुरक्षित बना दिया है।

भविष्य की चुनौतियां: साइबर सुरक्षा और डिजिटल फ्रॉड

भले ही कोलकाता और मुंबई पारंपरिक अपराधों को नियंत्रित करने में सफल रहे हैं, लेकिन डिजिटल युग में एक नई चुनौती 'साइबर अपराध' के रूप में उभरी है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में वित्तीय धोखाधड़ी और ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में लगभग 18-20% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मुंबई, जो भारत की वित्तीय राजधानी है, यहाँ डिजिटल सुरक्षा अब एक बड़ी प्राथमिकता बन गई है। पुलिस अब 'फिजिकल सुरक्षा' के साथ-साथ साइबर सेल को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। आने वाले समय में इन शहरों की रैंकिंग इस बात पर निर्भर करेगी कि वे अपने नागरिकों को ऑनलाइन ठगी और डेटा चोरी जैसे अदृश्य खतरों से कितना सुरक्षित रख पाते हैं।

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