

Vadodara Nagda Railway Section: भारतीय ट्रेनों के संचालन में सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कवच सिस्टम तेजी से लागू किया जा रहा है। इसी कड़ी में पश्चिमी रेलवे ने 30 मार्च, को वडोदरा-नागदा खंड पर कवच 4.0 प्रणाली को सफलतापूर्वक शुरू कर दिया। महाप्रबंधक प्रदीप कुमार ने वडोदरा स्टेशन से कवच-सक्षम एक विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
मिशन रफ्तार के तहत मुंबई-नई दिल्ली मुख्य गलियारे पर पश्चिमी रेलवे के अंतर्गत चिन्हित कुल 693 किलोमीटर मार्ग में से, कवच अब 559.5 किलोमीटर मार्ग पर स्थापित किया जा चुका है। जीएम प्रदीप कुमार ने बताया कि वडोदरा-नागदा खंड के अंतर्गत, कवच परियोजना को कुल 224.51 किलोमीटर मार्ग पर सफलतापूर्वक चालू कर दिया गया है, जिसमें वडोदरा से मंगल महुदी (122.5 किलोमीटर) और पंचपीपलिया से नागदा (102.01 किलोमीटर) शामिल हैं।
मंगल महुदी-पंचपीपलिया खंड के शेष भाग पर कार्य प्रगति पर है और स्वचालित सिग्नलिंग के साथ इसके शीघ्र ही पूरा होने की उम्मीद है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान, पश्चिमी रेलवे ने कुल 659.5 किलोमीटर मार्ग पर कवच प्रणाली को चालू कर दिया है। इससे पहले, जनवरी 2026 में, वडोदरा डिवीजन ने वडोदरा-विरार खंड पर कवच प्रणाली को परिचालन में लाया था, और अब इस प्रणाली को गोधरा होते हुए नागदा तक विस्तारित कर दिया गया है।
कवच एक उन्नत ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है जिसे मानवीय त्रुटि के जोखिम को कम करके सुरक्षा बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह खतरे के संकेत पर वाहन चलाने (एसपीएडी) के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक अतिरिक्त सुरक्षा परत के रूप में कार्य करता है। वडोदरा-नागदा खंड पर इस जटिल परियोजना के क्रियान्वयन में प्रत्येक स्टेशन और हर स्वचालित सिग्नलिंग खंड के लिए सावधानीपूर्वक योजना बनाई गई थी। पटरियों के किनारे 6,000 से अधिक आरएफआईडी टैग प्रोग्राम किए गए और लगाए गए।
26 स्टेशनों, 13 ब्लॉक खंडों और इंजनों के बीच निरंतर रेडियो संचार स्थापित किया गया। कुल 39 रेडियो टावर और उनसे संबंधित उपकरण लगाए गए। मार्ग पर ऊपर और नीचे दोनों दिशाओं में लगभग 600 किमी OFC केबल बिछाई गई। इसके अतिरिक्त, सभी स्टेशनों, ब्लॉक खंडों और लेवल क्रॉसिंग गेटों पर कवच उपकरण स्थापित किए गए और मौजूदा सिग्नलिंग प्रणाली के साथ एकीकृत किए गए। इंजनों को भी कवच उपकरणों से लैस किया गया, जिसके बाद पूरी प्रणाली का सफल परीक्षण किया गया।
ईटीसीएस जैसी यूरोपीय प्रणालियों की तुलना में कवच प्रणाली कहीं अधिक किफायती है। अब तक, कवच प्रणाली को WAP-7, WAG-9 और WAP-5 इंजनों में स्थापित किया जा चुका है, और जल्द ही इसे अन्य इंजनों में भी स्थापित करने की योजना है। पश्चिमी रेलवे के कुल 364 इंजनों में पहले ही कवच प्रणाली लगाई जा चुकी है।