बार-बार ट्रांसफर से बेटे को हुआ नुकसान; तुकाराम मुंढे बोले- पत्नी की डिलीवरी के लिए बेचनी पड़ी थी जमीन

Tukaram Mundhe Financial Struggles: IAS अधिकारी तुकाराम मुंडे ने बार-बार होने वाले तबादलों पर बात की है। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी ईमानदारी की कीमत उनके परिवार, पत्नी के करियर और बच्चों पर पड़ी है।
IAS Tukaram Mundhe Transfer Impact On Family
IAS तुकाराम मुंढेसोर्स: सोशल मीडिया
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Highlights

  • IAS तुकाराम मुंढे के बार-बार ट्रांसफर होने से उनकी पत्नी के करियर पर ब्रेक लगा

  • तुकाराम मुंढे के बच्चों की परवरिश प्रभावित हुई।

  • बेटे को हर साल स्कूल बदलना पड़ा, जिससे उसे कल्चरल शॉक से गुजरना पड़ा।

  • तुकाराम मुंढे को पैसों की कमी के कारण पुश्तैनी जमीन बेचनी पड़ी

IAS Tukaram Mundhe Transfer Impact On Family: ईमानदार और कड़क छवि वाले महाराष्ट्र कैडर के आईएएस अधिकारी और फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने बार-बार होने वाले तबादलों पर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि कैसे उनकी ईमानदारी की कीमत उनके परिवार, पत्नी के करियर और बच्चों की परवरिश को चुकानी पड़ी है।

तुकाराम मुंढे: तबादलों का परिवार पर असर

महाराष्ट्र के सबसे कड़क, बेबाक और ईमानदार आईएएस अधिकारियों में शुमार तुकाराम मुंढे अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। लेकिन इस कड़क छवि के पीछे एक ऐसा परिवार भी है, जिसे उनकी ईमानदारी की भारी कीमत चुकानी पड़ी है। हाल ही में एक मराठी समाचार चैनल को दिए गए एक इंटरव्यू में तुकाराम मुंढे ने अपने निजी जीवन, बार-बार होने वाले तबादलों और उससे परिवार को होने वाली परेशानियों पर खुलकर बात की।

हर ट्रांसफर के साथ पत्नी को बदलनी पड़ी नौकरी

तुकाराम मुंढे ने बताया कि तबादला सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह जाना नहीं है, बल्कि यह अपने साथ कई चुनौतियां लेकर आता है। उन्होंने अपनी पत्नी के करियर पर पड़े असर का जिक्र करते हुए कहा कि हर बार ट्रांसफर होने पर उनकी पत्नी को अपनी नौकरी बदलनी पड़ती थी। उन्हें हर नई जगह पर नए सिरे से संघर्ष करना पड़ा, जिसका सीधा असर उनके प्रोफेशनल करियर पर पड़ा।

तुकाराम मुंढे के बेटे की शिक्षा और परवरिश पर पड़ा गहरा प्रभाव

इसके साथ ही तुकाराम मुंढे के परिवार को हर बार एक नए सांस्कृतिक माहौल यानी कल्चरल शॉक का सामना करना पड़ा। लगातार तबादलों का सबसे बुरा असर उनके बेटे की पढ़ाई और मानसिक स्थिति पर पड़ा। मुंढे ने बताया कि उनके बेटे को हर साल नया स्कूल बदलना पड़ा, जिसके कारण वह कभी किसी जगह पर पक्के दोस्त नहीं बना पाया।

तुकाराम मुंढे बोले- बेटे को लेगा कल्चरल शॉक

मुंबई में सीनियर केजी में पढ़ने वाला बेटा, पहली कक्षा के लिए सोलापुर, दूसरी के लिए पुणे, तीसरी के लिए नासिक, चौथी के लिए नवी मुंबई और पांचवीं कक्षा में फिर मुंबई लौट आया। बार-बार स्कूल और शहर बदलने के कारण बेटे कल्चरल शॉक झेलना पड़ा।

तुकाराम मुंढे ने कहा कि मुंबई में उनके बेटे का स्कूल पास ही था। सोलापुर में हमने उसे बस से भेजने की कोशिश की, लेकिन उसने मना कर दिया। उसने कहा कि बाकी बच्चे इतना शोर मचाते थे कि वह उसे बर्दाश्त नहीं कर पाता था। हर जगह का माहौल और संस्कृति अलग थी। इन जगहों पर बस से स्कूल जाना उसके लिए एक ‘कल्चरल शॉक’ जैसा था, उसे बार-बार ऐसे झटकों का सामना करना पड़ा।

उसके जीवन के शुरुआती पांच-छह साल इसी सब से निपटने में बीत गए। यह एक ऐसा नुकसान है जिसकी भरपाई हम कभी नहीं कर सकते। मेरी पत्नी को भी यह सब झेलना पड़ा।

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मुंबई में तंगी के चलते बेचनी पड़ी थी पुश्तैनी जमीन

मुंबई शहर में बिताए अपने समय को याद करते हुए उन्होंने कहा कि करियर की शुरुआत में ही मेरी पोस्टिंग मुंबई में हो गई थी। 2005 बैच का अधिकारी होने के नाते, 2010 में मैंने मुंबई में खादी बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में काम किया। उस शहर में रहने का खर्च बहुत ज्यादा था, और मेरा बेटा तब सिर्फ एक साल का था।

महीने के अंत तक अक्सर हमारे खाते में पैसे नहीं बचते थे, इसकी एक वजह यह भी थी कि हम चर्चगेट में रहते थे, जहां हर चीज बहुत महंगी थी। हमने अपने विकल्पों पर काफी विचार किया। आखिरकार, हमने तय किया कि हम दोनों को काम करना होगा, क्योंकि घर चलाने के लिए सिर्फ एक व्यक्ति की सैलरी काफ़ी नहीं थी। इस तरह हमने उन मुश्किलों का सामना किया और उनसे पार पाया।

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तुकाराम मुंढे को पत्नी की डिलीवरी के लिए बेचनी पड़ी पुश्तैनी जमीन

अपनी ईमानदारी का जिक्र करते हुए IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे ने बताया कि मुंबई जैसे महंगे शहर में तैनाती के दौरान उन्हें भीषण आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। स्थिति इतनी विकट हो गई थी कि जब उनकी पत्नी दूसरी बार गर्भवती थीं, तो बच्चे के जन्म के समय अस्पताल का खर्च उठाने के लिए उन्हें अपनी पुश्तैनी जमीन का एक हिस्सा बेचना पड़ा था।

इसके बावजूद उन्होंने कभी किसी गलत या अनैतिक रास्ते को नहीं चुना। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी किसी भी तरह के प्रलोभन में नहीं आतीं और संयुक्त परिवार के समर्थन ने उन्हें इन मुश्किलों से लड़ने की ताकत दी।