जिंदगी की जंग में हुई जीत, दुरंतो एक्सप्रेस में फरिश्ता बनी नर्स, चलती ट्रेन में चाकू-धागे से कराई डिलीवरी

Duronto Express Nurse Safe Delivery: ट्रेन में प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला की मुंबई की स्टाफ नर्स मीनू भैसरे ने बिना डिलीवरी किट, चाकू-धागे की मदद से सुरक्षित डिलीवरी कर मां और नवजात की जान बचाई।
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सुरक्षित प्रसव के बाद परिवार (फोटो नवभारत)
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Duronto Express Nurse Safe Delivery Pregnant Woman: नागपुर से मुंबई आ रही दुरंतो एक्सप्रेस में उस समय जिंदगी की जंग जीत गई, जब प्रसव पीड़ा से तड़प रही एक गर्भवती महिला की चलती ट्रेन में ही सुरक्षित डिलीवरी कराई गई। बिना ग्लव्स, ब्लेड और डिलीवरी किट के मुंबई की स्टाफ नर्स मीनू भैसरे ने अदम्य साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए चाकू-धागे की मदद से मां व नवजात बच्ची की जान बचा ली। सीमित संसाधनों के बीच हुई इस सफल प्रसूति के बाद ट्रेन में नवजात की किलकारी गूंज उठी। इसी के साथ ही सहयात्रियों ने नर्स की मानवता और कर्तव्यनिष्ठा को सलाम किया।

नर्स मीनू भैसरे की वजह से डिलीवरी सफल

यह घटना 24 जून की रात की है। नागपुर निवासी 36 वर्षीय अंजुम बानो वसीम अख्तर अपनी 11 और 8 वर्ष की दो बेटियों के साथ दुरंतो एक्सप्रेस से मुंबई जा रही थीं। रात करीब 10 बजे उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हुई, लेकिन उन्होंने किसी को इसकी जानकारी नहीं दी। दर्द असहनीय होने पर सहयात्रियों को स्थिति का पता चला। उस समय ट्रेन भुसावल के पास तेज रफ्तार से दौड़ रही थी और अगला स्टेशन काफी दूर था। यात्रियों ने रेलवे हेल्पलाइन 139 पर संपर्क किया, लेकिन तत्काल चिकित्सकीय सहायता मिलना संभव नहीं था।

इसी दौरान एस-5 कोच में यात्रा कर रहीं मुंबई के बॉम्बे हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर की 27 वर्षीय स्टाफ नर्स मीनू भैसरे आगे आईं। उन्होंने देखा कि गर्भाशय की पानी की थैली फट चुकी थी और शिशु का सिर बाहर आने लगा था। ऐसे में इंतजार करना मां और बच्चे दोनों के लिए खतरनाक हो सकता था। सहयात्रियों ने साइड लोअर बर्थ के चारों ओर चादर लगाकर अस्थायी प्रसव कक्ष तैयार किया, जबकि ट्रेन में मौजूद एक नर्सिंग छात्रा ने भी उनका सहयोग किया।

जटिल परिस्थितियों में कराई डिलीवरी

मीनू के पास न तो डिलीवरी किट थी, न ग्लव्स, न कैंची और न ही स्टरलाइज्ड ब्लेड था। उन्होंने यात्रियों से नया ब्लेड मांगा, लेकिन उपलब्ध नहीं होने पर एक यात्री द्वारा दिए गए चाकू को हैंड सैनिटाइजर से अच्छी तरह साफ कर उसका इस्तेमाल किया। मां के पास मौजूद धागे से नाल बांधी और काटी। इसके बाद प्लेसेंटा बाहर निकालकर पानी, रुई और नैपकिन की मदद से मां और नवजात बच्ची को साफ किया तथा बच्ची को मां की छाती पर रखकर स्तनपान भी शुरू कराया।

चालीसगांव में तैयार था एंबुलेंस

आरपीएफ के अनुसार ट्रेन तड़के करीब 2.50 बजे चालीसगांव स्टेशन पहुंची, जहां पहले से एंबुलेंस तैयार थी। अंजुम, उनकी नवजात बेटी और दोनों बच्चियों को ग्रामीण अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने मां और बच्ची दोनों की हालत स्थिर बताई। अंजुम ने कहा कि उन्हें लगा था कि शायद वह और उनकी बच्ची नहीं बच पाएंगे, लेकिन नर्स मीनू ने दोनों की जान बचा ली। वहीं, मीनू भैसरे ने कहा कि उस समय उनका एकमात्र उद्देश्य मां और बच्चे को सुरक्षित रखना था।

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