

Dr Shrikant Shinde Returns From London: लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस (LSE) में अध्ययन के सिलसिले में लंदन प्रवास पर रहे शिवसेना संसदीय दल के नेता व कल्याण के सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे स्वदेश लौट आए हैं।
शनिवार को मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के आधिकारिक आवास 'नंदनवन' में विराजमान श्री गणराय का पत्नी वृषाली शिंदे और पुत्र रुद्रांश के साथ विधिवत पूजन कर आशीर्वाद लिया। उन्होंने प्रार्थना की कि प्रत्येक व्यक्ति की मनोकामना पूर्ण हो तथा महाराष्ट्र सहित संपूर्ण देश पर गणराय की कृपादृष्टि सदैव बनी रहे।
स्वदेश लौटने के बाद परिवार के साथ गणराय की पूजा करते हुए डॉ श्रीकांत शिंदे ने कहा कि कुछ दिनों तक घर और बाप्पा से दूर रहने के बावजूद मन में गणराय के आगमन की उत्कंठा कायम थी। परिवार के साथ विधिवत पूजा करने के बाद उन्हें आनंद और समाधान की अनुभूति हुई। विदेश में व्यस्त शैक्षणिक कार्यक्रम के बीच भी गणेशोत्सव और बाप्पा के प्रति उनका जुड़ाव बना रहा। वहां भी वे महाराष्ट्र मंडल के गणेशोत्सव में शामिल हुए।
डॉ शिंदे ने कहा लंदन में महाराष्ट्र मंडल द्वारा 26 सितंबर तक धूमधाम से गणेशोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जो विदेश में रह रहे मराठी समुदाय के लिए भी गणेशोत्सव की परंपरा और सांस्कृतिक जुड़ाव को कायम रखने का माध्यम बना हुआ है।
डॉ. श्रीकांत शिंदे ने अपने लंदन प्रवास के दौरान एमबीए की उच्च शिक्षा से जुड़ी अपनी नई शैक्षणिक यात्रा पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने LSE में TRIUM Global Executive MBA के अध्ययन की शुरुआत की है।
चिकित्सा क्षेत्र में MS Orthopaedics की शिक्षा पूरी करने के बाद अर्थव्यवस्था, सार्वजनिक नीति और नेतृत्व जैसे विषयों की समझ को विस्तार देने के उद्देश्य से उन्होंने इस अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम का चयन किया है।
डॉ. श्रीकांत शिंदे का जीवन निरंतर सीखने और अपनी जड़ों से जुड़े रहने का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। चिकित्सा में विशेषज्ञता हासिल करने के बाद भी लोकनीति और अर्थव्यवस्था की गहरी समझ के लिए LSE जैसे वैश्विक संस्थान में अध्ययन करना यह संदेश देता है कि शिक्षा की कोई उम्र या सीमा नहीं होती।
वहीं, व्यस्त शैक्षणिक प्रवास के बावजूद अपनी सांस्कृतिक परंपराओं और परिवार के साथ गणेशोत्सव की भक्ति भावना को प्राथमिकता देना यह सिखाता है कि सफलता के शिखर पर पहुंचकर भी अपनी संस्कृति और मूल्यों को संजो कर रखना ही व्यक्ति की असली पहचान होती है।