दिशा सालियान मौत मामला: जस्टिस आशीष चव्हाण ने सुनवाई से खुद को किया अलग, अब तक कई जज छोड़ चुके हैं केस

Bombay High Court: बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस आशीष चव्हाण ने दिवंगत दिशा सालियान मौत मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया। पिता सतीश सालियान ने सीबीआई जांच और FIR दर्ज करने की मांग की है।
Bombay HC Justice Ashish Chavan recuses himself from hearing the plea filed by Disha Salian's father seeking a CBI probe into his daughter's mysterious death in 2020.
दिशा सालियान मौत मामला (सोर्स: नवभारत डिजाइन फोटो)
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Bombay High Court Disha Salian Case: दिशा सालियान मौत मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान एक नया घटनाक्रम सामने आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस आशीष चव्हाण ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। याचिका दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान द्वारा दायर की गई है, जिसमें उन्होंने अपनी बेटी की 2020 में हुई मौत के पीछे बड़ी साजिश का आरोप लगाते हुए मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की मांग की है।

सतीश सालियान ने वर्ष 2025 में हाई कोर्ट का रुख करते हुए दावा किया था कि उनकी बेटी के साथ कथित तौर पर गैंगरेप किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने मामले में एफआईआर दर्ज करने तथा पूरी घटना की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए राजनीतिक स्तर पर साजिश रची गई थी।

कई न्यायाधीश सुनवाई से हो चुके हैं अलग

यह मामला पहले भी कई बार न्यायिक प्रक्रिया के कारण चर्चा में रहा है। जस्टिस आशीष चव्हाण से पहले 4 फरवरी को जस्टिस संदेश पाटिल ने भी सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। उन्होंने यह फैसला इसलिए लिया था क्योंकि न्यायाधीश बनने से पहले वे सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक (स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) के रूप में कार्य कर चुके थे। इससे पहले जस्टिस रेवती मोहिते-डेरे ने भी न्यायिक आवंटन (ज्यूडिशियल असाइनमेंट) से जुड़े कारणों का हवाला देते हुए मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। लगातार न्यायाधीशों के अलग होने के कारण अब यह याचिका नई पीठ के समक्ष सूचीबद्ध की जाएगी।

2020 में हुई थी दिशा सालियान की मौत

दिशा सालियान, दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की सेलिब्रिटी मैनेजर थीं। 8 जून 2020 को मुंबई के मालाड इलाके में एक आवासीय इमारत की 14वीं मंजिल से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी। उस समय मुंबई पुलिस ने मामले को आकस्मिक मृत्यु (एक्सीडेंटल डेथ) के रूप में दर्ज किया था और जांच की थी।

याचिका में कुछ हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, अब तक जांच एजेंसियों की ओर से किसी भी व्यक्ति के खिलाफ ऐसे आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई ठोस सबूत सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

नई बेंच के गठन का इंतजार

जस्टिस आशीष चव्हाण के खुद को अलग करने के बाद अब यह मामला बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष नई पीठ के गठन के लिए भेजा जाएगा। इसके बाद तय होगा कि याचिका पर आगे की सुनवाई किस बेंच के समक्ष होगी। फिलहाल मामले की मेरिट पर अदालत ने कोई टिप्पणी नहीं की है।

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