

Maharashtra Jayant Patil Fadnavis Meeting: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से उनके सरकारी निवास स्थान वर्षा पर एनसीपी अजीत पवार गुट के नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के बीच बैठक हुई। कुछ देर बाद एनसीपी शरद पवार गुट के नेता जयंत पाटिल भी वर्षा बंगले पर पहुंचे। बैठक की वजह अभी साफ नहीं हो पाई है लेकिन राजनैतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
इन बैठकों की आधिकारिक वजह फिलहाल सामने नहीं आई है। हालांकि, अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं की लगातार बैठकों ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषक इन मुलाकातों के संभावित राजनीतिक संकेतों को लेकर तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं।
शिवसेना (उबाठा) ने अपने छह बागी लोकसभा सदस्यों को कानूनी नोटिस भेजा है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले दल ने कहा है कि उसका विरोधी शिंदे गुट के साथ विलय कानूनन संभव नहीं है। दूसरी तरफ, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विपक्षी दल के इस कदम को पूरी तरह बेअसर बताते हुए खारिज कर दिया है।
शिवसेना (उबाठा) के संसदीय दल के नेता अरविंद सावंत ने 13 जुलाई को लिखे पत्रों में सभी छह सांसदों को याद दिलाया कि उन्होंने साल 2024 का लोकसभा चुनाव उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में और पार्टी के चुनाव चिह्न पर शिंदे गुट के खिलाफ लड़कर जीता था।
सावंत ने कहा कि मूल राजनीतिक दल ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना के साथ किसी भी तरह के विलय की न तो शुरुआत की है और न ही इसकी अनुमति दी है। संविधान की दसवीं अनुसूची (दलबदल विरोधी कानून) के पैराग्राफ 4 का हवाला देते हुए सावंत ने स्पष्ट किया कि जब मूल राजनीतिक दल का ही कोई विलय नहीं हुआ है, तो सदन के भीतर विधायी दल के विलय का सवाल ही नहीं उठता और कानून में भी इसकी कोई व्यवस्था नहीं है।
सावंत ने बताया कि पार्टी को सार्वजनिक माध्यमों से बागी सांसदों द्वारा विलय का दावा करने और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से संपर्क करने की जानकारी मिली है। उन्होंने साफ किया कि पार्टी अध्यक्ष को पहले ही सूचित कर चुकी है कि इन सांसदों के किसी भी विलय या अलग समूह को मान्यता न दी जाए, और अध्यक्ष ने भी अभी तक ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया है। इस बीच, ज्यादातर बागी सांसदों ने नोटिस पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि मुख्यमंत्री शिंदे पहले ही उनकी तरफ से जवाब दे चुके हैं।