'थोड़ी देर और होती तो...', एक्सीडेंट के बाद सड़क पर तड़प रहा था शख्स, लोग बना रहे थे वीडियो, DCP ने बचाई जान

Mahesh Chimte Help Accident Victim: मुंबई के वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर DCP महेश चिमटे ने सड़क हादसे में घायल युवक की जान बचाई, जबकि वहां मौजूद भीड़ मदद के बजाय वीडियो बना रही थी।
Mahesh Chimte Help Accident Victim
Mahesh Chimte Help Accident Victim (फोटो क्रेडिट-X)
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Mumbai DCP Mahesh Chimte: मुंबई के वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे पर बुधवार शाम को एक ऐसी घटना घटी जिसने समाज की संवेदनहीनता और पुलिस के मानवीय चेहरे को एक साथ उजागर कर दिया। मालाड से दहिसर की ओर जा रहे एक बाइक सवार युवक को एक तेज रफ्तार कार ने पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और युवक सड़क पर गिरकर खून से लथपथ होकर दर्द से तड़पने लगा। इस हादसे के बाद आरोपी कार चालक तो मौके से फरार हो गया, लेकिन वहां मौजूद भीड़ का व्यवहार और भी ज्यादा हैरान करने वाला था।

सड़क पर घायल पड़ा युवक मदद के लिए गुहार लगा रहा था, लेकिन वहां मौजूद दर्जनों लोग उसकी जान बचाने के बजाय अपने मोबाइल फोन से वीडियो बनाने और फोटो खींचने में व्यस्त थे। मायानगरी की इस भागमभाग में इंसानियत दम तोड़ती नजर आ रही थी। गनीमत रही कि उसी समय वहां से जोन-12 के पुलिस उपायुक्त (DCP) महेश चिमटे का काफिला गुजर रहा था, जिन्होंने भीड़ को देखकर तुरंत अपनी गाड़ी रुकवाई और स्थिति का जायजा लिया।

DCP ने अपनी सरकारी गाड़ी को बनाया एम्बुलेंस

भीड़ की संवेदनहीनता को देख DCP महेश चिमटे ने एक पल की भी देरी नहीं की। उन्होंने प्रोटोकॉल और सुरक्षा घेरे की परवाह किए बिना घायल युवक को सहारा दिया और उसे अपनी ही सरकारी गाड़ी की अगली सीट पर बिठाया। खून से लथपथ युवक को लेकर DCP खुद दहिसर के एक निजी अस्पताल पहुंचे। वहां उन्होंने स्वयं डॉक्टरों से बात की और यह सुनिश्चित किया कि युवक का इलाज तुरंत और बिना किसी कागजी देरी के शुरू हो सके। डॉक्टरों के अनुसार, युवक का कंधा गंभीर रूप से चोटिल था और अधिक खून बहने के कारण उसकी हालत नाजुक हो गई थी।

समय पर इलाज मिलने से बची युवक की जान

अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि अगर युवक को 10-15 मिनट की और देरी होती, तो अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी जान बचाना मुश्किल हो सकता था। 'गोल्डन ऑवर' (हादसे के तुरंत बाद का समय) में मुंबई पुलिस के DCP द्वारा दिखाई गई तत्परता ने युवक को नया जीवन दिया। वर्तमान में युवक की हालत स्थिर बताई जा रही है और उसके परिजन DCP महेश चिमटे के प्रति आभार व्यक्त कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि खाकी वर्दी के पीछे एक संवेदनशील दिल भी धड़कता है, जो संकट के समय नागरिकों की ढाल बनता है।

नेक मददगार बनें: कानून आपके साथ है

अक्सर लोग पुलिसिया कार्रवाई और अदालती चक्करों के डर से सड़क हादसों में घायलों की मदद करने से कतराते हैं, लेकिन सरकार ने अब 'गुड सेमेरिटन' (नेक मददगार) नियम लागू कर दिए हैं। इस नियम के तहत, यदि आप किसी घायल की मदद करते हैं, तो पुलिस आपको पूछताछ के लिए मजबूर नहीं कर सकती और न ही अस्पताल आपसे इलाज के लिए पैसों की मांग कर सकता है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे वीडियो बनाने के बजाय पहले घायल को अस्पताल पहुँचाने को प्राथमिकता दें, क्योंकि आपकी छोटी सी कोशिश किसी का घर उजड़ने से बचा सकती है।

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